वाल्मीकीय रामायणकी रचना
प्रिय महोदय! सप्रेम हरिस्मरण। कृपापत्र मिला। आपके प्रश्नोंका उत्तर इस प्रकार है—
१—स्त्री-जातिको ‘अबला’ इसलिये कहते हैं कि वह अपने बलका प्रदर्शन नहीं करती; पति-पुत्रोंकी मंगल-कामनासे वह प्रेममयी—स्नेहमयी बनी रहती है।
२—वाल्मीकीय रामायणके अनुसार वाल्मीकिजीने उस समय रामायणकी रचना आरम्भ की, जब श्रीरामचन्द्रजी वनसे लौटकर राजसिंहासनपर आसीन हो चुके थे। पद्मपुराणके अनुसार श्रीराम-जन्मके पहले रामायणकी रचना हो चुकी थी। ये दोनों ही बातें कल्पभेदसे ठीक हैं। महर्षि वाल्मीकि योग-शक्तिसे सम्पन्न थे। वे ध्यान लगाकर भूत, भविष्य और वर्तमान—तीनों कालोंकी बातें देख-जान सकते थे। शेष भगवत्कृपा।