मनुष्यका कर्तव्य

आपका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य कैसा है? शारीरिक स्वास्थ्यकी अपेक्षा मनुष्यके मानसिक स्वास्थ्यकी अधिक आवश्यकता है। सात्त्विक खुराक तथा राम-नामकी ओषधि मिलती रहनेसे मन स्वस्थ रह सकता है। सच्ची स्वस्थता तो ‘स्व’ में स्थित होनेसे है। जगत‍्की ऊँची-नीची घटनाएँ आप निरन्तर देख रहे हैं। आँखोंके सामने परिवर्तनका चक्र निरन्तर घूम रहा है। यहाँ कुछ भी स्थिर, नित्य नहीं है। अस्थिर और अनित्यमें सुख कहाँ? फिर अनित्यके पीछे जीवन लगा देना बुद्धिमानी नहीं कही जा सकती। अतएव सावधानीके साथ जीवनका प्रत्येक पल नित्य परमात्माकी खोजमें बिताना चाहिये। और उस नित्यको प्राप्तकर आनन्दरूप हो जाना चाहिये। यही मनुष्यका एकमात्र परम कर्तव्य है। इसके बिना सब कुछ व्यर्थ है।