नम्र निवेदन
भाईजी (श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार) के कुछ व्यक्तिगत पत्रोंका संग्रह ‘लोक-परलोकका सुधार (प्रथम भाग)’ के नामसे पूर्वमें प्रकाशित हुआ था। उसी संग्रहका दूसरा भाग भी प्रेमी पाठक-पाठिकाओंकी सेवामें प्रस्तुत है। इस भागमें प्राय: उन्हीं विषयोंका समावेश है, जिनकी चर्चा पहले भागमें आ चुकी है। इस प्रकार यह दूसरा भाग पहले भागका ही एक प्रकारसे पूरक होगा। दोनों भागोंको मिलाकर ही पढ़ना चाहिये। आशा है, प्रेमी पाठक इस भागको भी उसी चावसे पढ़ेंगे। मेरा विश्वास है कि जो लोग इन पत्रोंको मननपूर्वक पढ़ेंगे और उनमें आयी हुई बातोंको अपने जीवनमें उतारनेकी ईमानदारीके साथ चेष्टा करेंगे, उन्हें निश्चय ही महान् लाभ होगा और उन्हें लोक-परलोक दोनोंका सुधार करनेमें यथेष्ट सहायता मिलेगी।
विनीत
चिम्मनलाल गोस्वामी