प्रभुकी इच्छा कल्याणमयी होती है

प्रभुकी इच्छा कुछ भी हो, है कल्याणमयी ही। प्रभुमें अशुभ इच्छा होती ही नहीं। संसारमें ये क्रिया-प्रतिक्रिया तो चलती ही रहेंगी।

श्रीभगवान‍्का भजन करते रहियेगा। संसारके कामोंके लिये भगवत्प्रेरणानुसार उचित चेष्टा कर लेनी चाहिये। फिर जो कुछ भी हो, उसीमें सन्तोष करना चाहिये। क्योंकि वही होना पहलेसे निश्चित था।