रुपयेको महत्त्व नहीं देना चाहिये

आपका कृपापत्र मिला। × × × अखण्ड कीर्तनका × × × प्रबन्ध हो गया, सो अच्छी बात है। भगवान् सब व्यवस्था करते हैं। मैं आजकल प्राय: अलग-सा रहता हूँ। रुपये-पैसेके सम्बन्धमें किसीसे कुछ कहनेका मन नहीं करता। रुपयेका सम्बन्ध बहुत ही खराब है। मन तो ऐसा करता है, जिन कामोंमें रुपयेका सम्बन्ध है, वे काम ही न किये जायँ। बस, भजन किया जाय। जगत‍्का भला होना होगा तो भजनसे ही हो जायगा। परंतु अपने जगत‍्के भलेका ठेका भी क्यों लें। जगत‍्का कल्याण तो श्रीभगवान‍्के किये होगा। रुपया आता है रुपयेवालोंसे, और विभिन्न कारणोंसे ऐसी परिस्थिति हो गयी है कि रुपयेवाले जिनको रुपये देते हैं, उन्हें अपनेसे हीन ही समझते हैं। भजनका महत्त्व घटकर रुपयेका प्रभुत्व बढ़ जाता है। मुझे तो अपने अनुभवसे यह कहना पड़ता है कि तकलीफ उठा लेना उत्तम, परंतु रुपयेकी याचना करना बहुत नीचा काम है। बिना याचनाके भी रुपयेको स्वीकार करना अच्छा नहीं है। विश्वास भगवान‍्में होना चाहिये, रुपयोंमें नहीं। आप किसीसे रुपया नहीं माँगते आपकी यह बात मुझको बहुत ही अच्छी लगती है।

आपने जो यह आशीर्वाद दिया कि ‘करहिं सदा रघुनायक छोहू’ सो बड़ी ही कृपा है। बस, भगवान‍्की कृपाका ही भरोसा है। वे अकारण कृपालु हैं। उनकी और संतोंकी दया बनी रहे; और क्या चाहिये। यहाँ सब आनन्द है, दिन बहुत अच्छी तरह कट रहे हैं। भगवान् श्रीकृष्णकी बड़ी ही कृपा है।