निवेदन
परमश्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज जहाँ भी जाते हैं, वहाँ वे प्रतिदिन प्रात: ठीक पाँच बजेसे गीतोक्त स्तुति एवं गीतापाठके बाद प्रवचन किया करते हैं। ये प्रवचन भगवदभिलाषी साधकोंके लिये बहुत ही उपयोगी हुआ करते हैं। उन्हींमेंसे कुछ प्रवचनोंका संग्रह प्रस्तुत पुस्तकके रूपमें प्रकाशित किया जा रहा है। ये प्रवचन ‘जोधपुर’ में संवत् २०४३ (सन् १९८६)-में हुए चातुर्मास्य सत्संग-कार्यक्रमसे लिये गये हैं।
मनुष्यमात्र भगवत्प्राप्तिका अधिकारी है और वह प्रत्येक परिस्थितिमें भगवान्को प्राप्त कर सकता है—यह इन प्रवचनोंका सार विषय है। इस विषयको भलीभाँति समझनेके लिये पाठकोंको इस पुस्तकका गम्भीरतापूर्वक अध्ययन-मनन करना चाहिये।