निवेदन

प्रस्तुत पुस्तकमें परमश्रद्धेय श्रीस्वामीजी महाराजके नौ लेखोंका संग्रह है। पारमार्थिक रुचिवाला प्रत्येक साधक इनका अध्ययन-मनन करके मृत्युसे ऊँचा उठकर अमरता प्राप्त कर सकता है। परन्तु साधकका उद्देश्य अनुभव करनेका होना चाहिये, कोरी बातें सीखनेका नहीं। सीखा हुआ ज्ञान अभिमान बढ़ानेके सिवाय और कुछ काम नहीं आता। अत: पाठकोंसे निवेदन है कि वे अनुभव करनेके उद्देश्यसे इस पुस्तकका गम्भीरतापूर्वक अध्ययन-मनन करें और अपना मानव-जीवन सार्थक करें।