भगवान् प्रेमस्वरूप हैं

कुछ लोगोंकी धारणा है कि भगवान् दण्ड देते हैं। पर असलमें भगवान् दण्ड नहीं देते। भगवान् प्रेमस्वरूप हैं। वे स्वाभाविक ही सर्वसुहृद् हैं। सुहृद् होकर किसीको तकलीफ कैसे दे सकते हैं? विश्वकल्याणके लिये विश्वका शासन कुछ सनातन नियमोंके द्वारा होता है। यदि हम उन नियमोंका अनुसरण करके उनके साथ जीवनका सामंजस्य कर लेते हैं तो हमारा कल्याण होता है; परंतु यदि हम लापरवाहीसे या जान-बूझकर उन प्राकृत नियमोंका उल्लंघन करते हैं तो हमें तदनुसार उसका बुरा फल भी भोगना पड़ता है, पर वह भी होता है हमारे कल्याणके लिये ही; क्योंकि कल्याणमय भगवान् के नियम भी कल्याणकारी ही हैं। अत: भगवान् किसीको दण्ड नहीं देते, मनुष्य आप ही अपनेको दण्ड देता है। भगवान् प्रेमस्वरूप हैं—सर्वथा प्रेम हैं और वे जो कुछ हैं, वे ही सबको सर्वदा वितरण कर रहे हैं!