दुर्व्यवहारसे दुर्गति

जो पुरुष अपनी साध्वी स्त्री तथा अन्यान्य आश्रितोंके साथ दुर्व्यवहार करते हैं, थोड़ी-सी भूलके लिये बात-बातमें क्रोधातुर होकर उन्हें डाँटते-फटकारते, उनका तिरस्कार करते और उन्हें जली-कटी सुनाया करते हैं, उनके पाप निरन्तर बढ़ते रहते हैं और वे लोक-परलोकमें भयानक दु:खोंके भागी होते हैं। ऐसे लोगोंपर भगवान् की कृपा नहीं होती और उनके पूजा-पाठ, धर्म-कर्म, तीर्थ-व्रत आदि भी सफल नहीं होते। पद्मपुराणमें कहा गया है—

पतिव्रतरतां भार्यां सुगुणां पुण्यवत्सलाम्॥

तामेवापि परित्यज्य धर्मकार्यं प्रयाति य:।

वृथा तस्य कृत: सर्वो धर्मो भवति नान्यथा॥

भार्यां विना हि यो लोके धर्मं साधितुमिच्छति।

विफलो जायते लोके नान्नमश्नन्ति देवता:॥

(भूमिखण्ड, अ०५९)

‘जो पुरुष अपनी सद्‍गुणवती, पुण्यानुरागिणी पतिव्रता पत्नीका परित्याग कर धर्मके लिये बाहर जाता है, उसका किया हुआ सारा धर्म व्यर्थ होता है—इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।’

‘जो पुरुष अपनी पत्नीको छोड़कर धर्मसाधनकी इच्छा करता है, वह संसारमें असफल होता है और उसका अन्न देवता ग्रहण नहीं करते।’

खास करके जो पुरुष अपनी पुत्रादिरहित पत्नीको निराश्रय छोड़कर संसार-त्याग करनेकी इच्छा करता है, वह तो बहुत बड़ा प्रमाद करता है; क्योंकि ऐसी परित्यक्ता स्त्री यदि विपरीत परिस्थितिमें पड़कर किसी प्रकार भी पथभ्रष्ट हो दुश्चरित्रा हो जाती है तो उस पुरुषकी कई पीढ़ीतक पितरोंको नरकोंमें जाना पड़ता है। और इसका सारा दायित्व उस पुरुषपर होता है। पतिके दुर्व्यवहारसे अत्यन्त पीड़ित होकर जिसकी स्त्री आत्मघात आदि दुष्कर्म कर बैठती है, उस पातकी पुरुषको इस लोक और परलोकमें भयानक दु:खोंकी प्राप्ति होती है।

जो पुरुष अपनी पत्नीका परित्याग करके परस्त्रीमें आसक्त होता है या दूसरी स्त्रीको पत्नी बनाता है, वह जन्मान्तरमें स्त्रीयोनिको प्राप्त होकर विधवा होता है—

य: स्वनारीं परित्यज्य निर्दोषां कुलसम्भवाम्।

परदाररतो हि स्यादन्यां वा कुरुते स्त्रियम्।

सोऽन्यजन्मनि देवेशि स्त्री भूत्वा विधवा भवेत्॥

(स्कन्दपुराण)

इसी प्रकार जो स्त्री स्वेच्छासे या किसीके प्रस्तावसे सम्मत होकर परपुरुषमें आसक्त हो कुकृत्य करती है, पतिको कष्ट पहुँचाने तथा पवित्र सतीत्व-धर्मसे डिगनेके कारण उसकी संतान और धनका नाश हो जाता है, परलोकमें उसे भयानक नरक-यन्त्रणा भोगनी पड़ती है, जवानीमें विधवा होना पड़ता है और उसके बाद विविध दु:ख-संतापमयी घृणित कुयोनियोंमें जन्म लेकर घोर क्लेशयुक्त जीवन बिताना पड़ता है।