अवसर हाथसे मत जाने दो

याद रखो—तुम अकेले आये हो और अकेले ही जाओगे। यहाँकी न तो कोई चीज तुम्हारे साथ जायगी और न कोई आत्मीय स्वजन ही जायगा।

याद रखो—आज घरमें तुम्हारी बड़ी आवश्यकता है। तुम भी ऐसा मानते हो कि मुझसे ही सारा काम चलता है, मेरे न रहनेपर काम कैसे चलेगा? पर तुम्हारे मरते ही कोई-न-कोई व्यवस्था हो जायगी और कुछ दिनों बाद तो तुम्हारे अभावका स्मरण भी नहीं होगा।

याद रखो—जैसे आज तुम अपने पिता-पितामह आदिको भूल गये हो और अपनी स्थितिमें मस्त हो, ऐसे ही तुम्हारी संतान भी तुम्हें भूल जायगी।

याद रखो—तुम व्यर्थ ही आसक्ति तथा ममताके जालमें फँस रहे हो और मानव-जीवनके असली ध्येयको भूलकर जिससे एक दिन सारा सम्बन्ध छूट जायगा और कभी उसकी याद भी नहीं आयेगी, उसीमें मनको फँसाकर, जीवनको अधोगतिकी ओर ले जा रहे हो।

याद रखो—तुम पहले कहीं थे ही, वहाँ तुम्हारे माता-पिता, घर-द्वार, पत्नी-पुत्र आदि भी होंगे ही। आज तुम्हें जैसे उनकी याद ही नहीं है, वे किस हालतमें कहाँ हैं, इसका पता लगानेकी भी कभी चिन्ता मनमें नहीं होती, वैसे ही यहाँसे चले जानेपर दूसरे जन्ममें यहाँके सब कुछको भूल जाओगे।

याद रखो—सम्बन्ध अनित्य और काल्पनिक होनेपर भी जबतक तुम्हारी इसमें ममता और आसक्ति है, तबतक तुम्हारी कामना-वासना नहीं मिट सकती एवं जबतक कामना-वासना रहेगी, तबतक दुष्कर्म भी बनते ही रहेंगे और जबतक दुष्कर्म बनेंगे, तबतक सुखका भी मुख कभी भी नहीं दीखेगा।

याद रखो—जबतक तुम यह सोचते रहोगे कि अमुक परिस्थिति आनेपर भगवान‍्का भजन करूँगा, तबतक भजन बनेगा ही नहीं, परिस्थितिकी कल्पना बदलती रहेगी; अतएव तुम जिस परिस्थितिमें हो, उसीमें भजन आरम्भ कर दो। भजन होने लगनेपर परिस्थिति आप ही अनुकूल हो जायगी।

याद रखो—भजनमें मन लगनेपर संसारके बन्धन स्वयमेव शिथिल हो जायँगे। भगवान‍्में ममता और आसक्ति हो जायगी, तब घर-परिवार, धन-सम्पति, यश-मान आदिकी हथकड़ी-बेड़ियाँ अपने-आप कट जायँगी। फिर इसके लिये कोई अलग प्रयास नहीं करना पड़ेगा।

याद रखो—जगत‍्से भागनेकी चेष्टा करोगे, इसे छोड़ने जाओगे तो और भी जकड़ोगे। इसे छोड़नेका प्रयत्न छोड़कर भगवान‍्में लगानेका—सब प्रकारसे लगनेका प्रयत्न करो। भगवान‍्की रूप-माधुरीकी जरा-सी झाँकी मिलते ही भोगोंके रूप-सौन्दर्यका—सुख-विलासका स्वप्न तत्काल भंग हो जायगा। फिर इस ओर झाँकनेको भी मन नहीं करेगा।

याद रखो—मानव-जीवन अजगरोंकी भाँति लम्बे कालतक नहीं रहता। फिर इस समय तो बालक तथा तरुण भी सहसा मृत्युके शिकार हो जाते हैं। अतएव बुढ़ापेकी प्रतीक्षा न करके तुरंत भजनमें लग जाओ। यह अवसर हाथसे निकल गया तो पीछे सिवा पछतानेके कोई भी उपाय नहीं रह जायगा।

याद रखो—भगवान‍्ने तुमपर कृपा करके संसार-सागरसे तरने और भगवान‍्का प्रेम प्राप्त करनेके सारे साधन सुलभ कर दिये हैं। इन साधनोंको पाकर भी यदि तुम असावधान रहोगे और इनसे लाभ नहीं उठाओगे तो तुम्हारे समान मूर्ख और कौन होगा?