भगवान् सदा सर्वत्र विराजमान हैं
याद रखो—भगवान् सदा सर्वत्र विराजमान हैं। तुम्हारे हृदयके गम्भीर अन्तस्तलमें भी वे सदा-सर्वदा रहते हैं। अकेली कोठरीमें तुम जो कुछ करते हो, उसको वे जानते-देखते हैं, इसमें तो कहना ही क्या है, तुम अपने हृदयके अत्यन्त गोपनीय स्थलमें विचाररूपसे भी जो कुछ सोचते-विचारते हो, जिसका कभी-कभी तुम्हें भी स्पष्ट ज्ञान नहीं होता, उसे भी वे प्रत्यक्ष करते हैं। ऐसा कभी, कहीं, कुछ होता ही नहीं, जिसे भगवान् न जान पाते हों, न देख पाते हों।
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याद रखो—यदि भगवान्की इस सर्वज्ञता और सर्वसाक्षितापर तुम्हारा विश्वास हो जाय तो फिर तुम छिपकर भी कभी कोई निषिद्ध कर्म नहीं कर सकते। मनकी गहरी गुफामें भी कोई पापकी बात नहीं सोच सकते। यह सभी जानते हैं कि जब मनुष्य कोई बुरा कर्म करना चाहता है, उस समय यदि उसे यह सन्देह भी हो जाता है कि मेरे इस कर्मको कोई सम्भ्रान्त पुरुष, कोई पुलिसका मामूली सिपाही अथवा कोई साधारण मनुष्य भी देखता है तो वह उस बुरे कर्मसे हट जाता है। उसे संकोच, लज्जा और भय मालूम होता है उस कर्मका आचरण करते। फिर यहाँ तो स्वयं सर्वलोकमहेश्वर, सर्वज्ञ-शिरोमणि, सर्वसमर्थ भगवान् तुम्हारे प्रत्येक कर्मको देख रहे हैं। ऐसी अवस्थामें तुमसे पाप क्योंकर बन सकते हैं। पर जब बनते हैं—पापके विचार मनमें आते हैं और पापकी क्रिया भी तन-वचनसे होती है, तब यही कहना पड़ता है कि भगवान्की सर्वत्र व्याप्त सत्तापर तुम्हारा विश्वास नहीं है। भगवान्की सत्तापर विश्वास आते ही मनुष्य पापकर्मसे छूट जाता है।
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याद रखो—भगवान् बड़े ही दयालु हैं। तुम उनकी सत्तापर विश्वास नहीं करते, तो भी वे तुमपर नाराज नहीं होते। वैसे ही जैसे बच्चेके अपराधपर माँ नाराज नहीं होती। उनकी इस दयालुतापर विश्वास करो और उन्हींसे यह वर माँग लो, जिसमें उनकी सर्वगत सत्ता तथा सदा-सर्वत्र स्थितिपर तुम्हारा अटल विश्वास हो जाय।
याद रखो—भगवान् सदा-सर्वत्र विराजमान हैं, इस सत्यपर विश्वास होते ही तुम पापरहित तो हो ही जाओगे, निर्भय भी हो जाओगे। पुलिसका सिपाही साथ रहता है तो मनुष्य चोर-डाकुओंसे निर्भय हो जाता है, फिर जब साक्षात् अखिल-लोक-सम्राट् सर्वशक्तिमान् भगवान् तुम्हारे साथ होंगे तब तुम्हें किससे कैसा भय रहेगा? फिर तो प्रत्येक स्थितिमें भगवान्को अपने साथ जानकर तुम निर्भय रहोगे।
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याद रखो—भगवान्की सत्तापर विश्वास होते ही तुम निश्चिन्त भी हो जाओगे; क्योंकि भगवान् सर्वलोकमहेश्वर और सर्वशक्तिमान् होनेके साथ ही तुम्हारे सहज सुहृद् भी हैं और उनको तुम नित्य अपने साथ अपने अत्यन्त समीप देखते हो। भगवान्-सा परम सुहृद् जिसके साथ हो, उसको किस बातकी चिन्ता रहेगी। वह परम सुहृद् अपने-आप ही किस बातमें, कब, कैसे तुम्हारा कल्याण होगा, उस बातको सोचेगा और पूरी करेगा। उसके सोचनेमें भूल भी नहीं होगी, क्योंकि वह सर्वज्ञ-शिरोमणि है; उसके द्वारा तुम्हारा काम हो ही जायगा, क्योंकि वह सर्वशक्तिमान् है और वह तुम्हारा काम निश्चय ही उल्लासपूर्वक करेगा, क्योंकि सुहृद्का यही स्वभाव होता है।
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याद रखो—तुमसे जो प्रकाश-अप्रकाशमें पाप बनते हैं, तुम्हें जो एकान्तमें भूतकी कल्पनासे भय लगता है, तुम जो पद-पदपर विभिन्न कारणोंसे डरते हो और तुम जो दिन-रात योगक्षेमके चिन्तानलसे जलते रहते हो इसका एकमात्र कारण यही है कि तुम्हारा सर्वशक्तिमान् सर्वेश्वर परम सुहृद् भगवान्की नित्य सर्वत्र सत्ता एवं स्थितिमें विश्वास नहीं है। विश्वास करो और सहज ही पापरहित, भयरहित और चिन्ता-विषादरहित बन जाओ। देखो—कितना सरल साधन है यह समस्त पाप-तापसे मुक्त होनेका।