भगवान् सदा तुम्हारे साथ हैं

विश्वास करो—भगवान् सदा तुम्हारे साथ हैं। कहीं भी किसी भी समय वे तुम्हें अकेला नहीं छोड़ते। घरमें, वनमें, दिनमें, रातमें, जाग्रत्-स्वप्नमें—सदा ही वे तुम्हारे साथ रहते हैं। तुम विश्वास करके स्वयं इस बातका अनुभव कर सकते हो और ऐसा अनुभव होते ही तुम निश्चिन्त और निर्भय हो जाओगे।

विश्वास करो—भगवान् सदा ही अपना अभयकारी और वरद हस्त तुम्हारे सिरपर रखे हुए हैं। तुम विश्वास नहीं करते, इसीसे तुम्हें उसका अनुभव नहीं होता।

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विश्वास करो—जिसको तुम अमंगल या अशुभ समझते हो, जिसको तुम अप्रिय या अनिष्ट समझते हो, जिसको तुम अवांछनीय या अनादरणीय समझते हो और जिसको तुम अत्यन्त दु:खदायी या यन्त्रणामय समझते हो, उसमें भी भगवान‍्का स्वाभाविक सहज सौहार्द ही काम करता है। भगवान‍्के सहज सौहार्दपर विश्वास न होनेके कारण ही तुम हर समय और हर जगह उनकी कृपाका तथा प्रेमका और उनके सुहृद्-स्वरूपका दर्शन नहीं कर पाते और इसीलिये तुम घबराकर अपने-आपको और भी दु:ख-सागरमें ढकेल देते हो।

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विश्वास करो—भगवान् कृपामय हैं, प्रेममय हैं। मूर्तिमान् कृपा और मूर्तिमान् प्रेम ही हैं। उनसे जो कुछ तुम्हें मिलता है वह सचमुच कृपा और प्रेम ही मिलता है। अमृतके सरोवरमेंसे अमृतके अतिरिक्त और क्या मिलेगा?

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विश्वास करो—जैसे चीनीके बने हुए सिंह, सर्प, भालू आदि क्रूर जानवर भी असलमें केवल चीनी-ही-चीनी हैं, भले ही उनकी आकृति क्रूर जानवरोंकी-सी हो, वैसे ही भगवान‍्के विधानसे जो कुछ भी तुम्हारे लिये बनता है, वह केवल भगवान‍्की कृपा और प्रेम ही है, चाहे उसका आकार-प्रकार भयानक ही हो।

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विश्वास करो—वे लोग परम धन्य हैं, जो सदा-सर्वदा-सर्वत्र समस्त कार्योंमें और समस्त फलोंमें भगवान‍्की परम अहैतुकी कृपा और प्रेमको देख-देखकर नित्य निर्भय और निश्चिन्त तो रहते ही हैं, भगवान‍्की अहैतुकी कृपा और प्रीतिके दर्शन करके पद-पदपर परम आनन्द और विलक्षण शान्तिका अनुभव करते हैं। किसी भी स्थितिमें न तो उन्हें किसी प्रकारका मानसिक क्लेश होता है और न वे अपनी आनन्दकी स्थितिसे विचलित ही होते हैं। इसीलिये न उन्हें कोई भी अन्य सुख अपनी ओर खींच सकता है और न कोई भी भारी-से-भारी दु:ख ही उन्हें उद्विग्न कर सकता है।

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विश्वास करो—जो शास्त्र और संतोंकी वाणीपर श्रद्धा-विश्वास करके भगवान‍्की अहैतुकी कृपा तथा प्रीतिके अनुभव करनेका सतत प्रयत्न करते हैं, वे कभी-न-कभी भगवान‍्की सहज कृपा तथा प्रीतिके दर्शन करके कृतार्थ हो ही जायँगे।

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विश्वास करो—जो सच्चे हृदयसे भगवान‍्की ओर चलता है और सतत आगे बढ़ना चाहता है, शक्तिभर जी नहीं चुराता बल्क पद-पदपर उल्लास तथा उत्साहके साथ भगवान‍्की कृपाशक्तिपर विश्वास करके अपने सामर्थ्यके अनुसार चलनेका प्रयत्न करता है, भगवान् उसे शक्ति देते हैं, बुद्धि देते हैं, प्रकाश देते हैं और अपने वरद हस्तका सहारा देकर अपने नित्य चिन्मय परमधाममें ले जाते हैं। उसका जीव-जीवन सदाके लिये सफल हो जाता है।