भगवान्की सन्निधि
विश्वास करो—भगवान् सदा तुम्हारे साथ हैं—सर्वथा सन्निकट हैं। कभी किसी भी स्थितिमें वे तुम्हें अकेला नहीं छोड़ सकते। तुम इस बातपर विश्वास नहीं करते, इसीसे डरते और अपनेको असहाय मानते हो। भगवान्को साथ मान लो। वे सर्वज्ञ हैं, सर्वशक्तिमान् हैं और तुम्हारे सुहृद् हैं। उनको साथ मानते ही तुम सर्वथा निर्भय और सुरक्षित हो जाओगे।
विश्वास करो—भगवान्की सन्निधिमें अपनेको निर्भय और सुरक्षित जान लेनेपर कोई भी—कितनी भी बड़ी बाहरी विपत्ति—जो भगवान्की किसी गूढ़ अभिसन्धिसे तुम्हारे मंगलके लिये ही आती है—तुम्हारे मनमें तनिक भी भय और असहायताकी भावना उत्पन्न न कर सकेगी।
विश्वास करो—भगवान्की सन्निधि तुम्हारे मनकी सारी दुर्बलताओं—दुर्भावनाओंको नष्ट कर देगी। फिर तुमसे ऐसा कोई अनुचित कार्य—पाप होगा ही नहीं, जिसका फल दु:ख, संताप हो। फिर भी यदि कभी किसी रूपमें दु:ख या विपत्तिके दर्शन होंगे तो तुम्हें उसमें भगवान्के मंगलमय संकेतका ही साक्षात्कार होगा।
विश्वास करो—जो मनुष्य अपनेको भगवान्की सन्निधिमें जानकर जीवन-यापन करता है, वह न तो कभी कोई बुरा कर्म ही कर सकता है और न (बुरा कर्म न करनेपर भी) आयी हुई किसी विपत्ति, हानि, अकीर्ति या तिरस्कृतिसे ही उद्विग्न या विषादग्रस्त होता है। वह प्रत्येक स्थितिमें मंगलमय भगवान्की मंगल मूर्तिका स्पर्श पाकर अपनेको सदा भगवत्कृपाके सुधासिन्धुमें गोते लगाते पाता है।
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विश्वास करो—तुम्हें जो कुछ प्राप्त है, प्राप्त हो रहा है और होगा, सब तुम्हारे परम सुहृद्, नित्यसंगी भगवान्की दृष्टिमें है और वस्तुत: उन्हींका मंगल-विधान है। यदि तुम उसमें घबराते या शोक-विषाद करते हो तो मानना पड़ेगा कि परम मंगलमय भगवान्के मंगल-विधानमें तुम्हारी श्रद्धा नहीं है।
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विश्वास करो—भगवान् जिसमें तुम्हारा कल्याण समझते हैं और उनके विधानसे जो कुछ (जीवन-मृत्यु, मान-अपमान, लाभ-हानि, सुख-दु:ख, सम्पत्ति-विपत्ति) तुम्हें मिलता है, उसीमें तुम्हारा यथार्थ कल्याण है। तुम जो चाहते हो और जिसमें अपना कल्याण समझते हो, सम्भव है वह तुम्हारे लिये अकल्याणकारी हो। अतएव अपनेको तथा अपने भविष्यको सर्वथा मंगलमय भगवान् पर छोड़कर निश्चिन्त हो जाओ। जहाँतक सात्त्विक बुद्धि काम दे, भगवान्की पूजाके भावसे सामने आये हुए कर्तव्यका पालन करते रहो। उसमें प्रमाद मत करो। परंतु यह कभी मत सोचो कि ‘यों होता तो लाभ था और यों नहीं हुआ तो बड़ी हानि हो गयी।’ याद रखो—अन्तमें जो कुछ होता है, वही यथार्थ होता है और उसीमें तुम्हारा लाभ है।
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विश्वास करो—भगवान् सदा मंगल ही करते हैं, यह दूसरी बात है कि उनके करनेका तरीका तुम्हें रुचिकर न हो। परंतु यदि तुम विश्वास कर लो तो फिर उनका तरीका भी रुचिकर हो जायगा और पहले जो अत्यन्त प्रतिकूल तथा भयानक दीखता था, वही अनुकूल तथा रमणीय दीखने लगेगा। फिर मृत्युमें भी तुम उनका मंगल दर्शन पाकर मुग्ध हो जाओगे।