भगवत्प्राप्तिमें जीवनकी सफलता
याद रखो—मानव-जीवनकी सफलता भगवत्प्राप्तिमें है, विषय-भोगोंकी प्राप्तिमें नहीं। जो मनुष्य जीवनके असली लक्ष्य भगवान्को भूलकर विषयभोगोंकी प्राप्ति और उनके भोगमें ही रचा-पचा रहता है, वह अपने दुर्लभ अमूल्य जीवनको केवल व्यर्थ ही नहीं खो रहा है वरं अमृत देकर बदलेमें भयानक विष ले रहा है।
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याद रखो—बहुत जन्मोंके बाद बड़े पुण्यबल तथा भगवत्कृपासे जीवको मानव-शरीर प्राप्त होता है, इन्द्रियोंके भोग तो अन्यान्य योनियोंमें भी मिलते हैं; पर भगवत्प्राप्तिका साधन तो केवल इसी शरीरमें है, इसको पाकर भी जो मनुष्य विषयभोगोंमें ही फँसा रहता है—वह तो पशुसे भी अधिक मूढ़ है।
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याद रखो—यदि तुमने इस जीवनमें भगवान्को नहीं प्राप्त किया—कम-से-कम भगवत्प्राप्तिके पथपर नहीं आ गये तो तुम्हें पीछे इतना पछताना पड़ेगा कि जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। अत: हाथमें आये हुए इस महान् सुअवसरके एक-एक क्षणको बड़ी ही सावधानीके साथ जीवनके असली लक्ष्य भगवत्प्राप्तिके साधनमें ही लगाना चाहिये।
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याद रखो—यहाँके जिन धन-ऐश्वर्य, पद-अधिकार, यश-कीर्ति और मान-मर्यादाके लिये तुम पागल हो रहे हो, उनमेंसे कोई भी कभी भी, तुमको तृप्ति नहीं दे सकेंगे। उनके अधूरेपनमें कभी पूर्णता आयेगी ही नहीं और इस कारण तुम्हारी कमी कभी पूरी होगी ही नहीं।
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याद रखो—इन विषयोंकी प्राप्तिके लिये जो तुम दिन-रात भाँति-भाँतिके नये-नये पाप कर रहे हो, इसीमें अपना कल्याण समझ रहे हो और गौरवका अनुभव कर रहे हो, यह तुम्हारे लिये बहुत ही घातक होगा। इससे तुम्हें जीवनमें कभी शान्ति और सुख तो मिलेगा ही नहीं; वरं वह सदा निराशा, दु:ख, चिन्ता, शोक और विषादसे भरा रहेगा। मरनेके बाद भी तुम्हें इस पापके भारी बोझको ढोकर अपने साथ ले जाना पड़ेगा और विविध योनियोंमें अनेकों प्रकारके भीषण दु:ख-भोगके लिये बाध्य होना पड़ेगा।
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याद रखो—बुद्धिमान् मनुष्य वही है जो इन दु:ख उत्पन्न करनेवाले विषय-भोगोंमें मनको नहीं फँसाता और भगवान्का स्मरण करता हुआ जगत्के सारे काम उसी प्रकार करता है, जिस प्रकार नाट्यमंचपर अभिनेता अपने स्वाँगके अनुसार खेल करता है केवल प्रभुको रिझानेके लिये। असलमें वही सच्चा मनुष्य है।
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याद रखो—तुम मनुष्य हो; अपने मनुष्यत्वको सदा जगाये रखो—एक क्षणके लिये भी भगवान्को मत भूलो। सदा स्मरण रखो कि यहाँ इस शरीरमें भगवान्ने तुमको पशुकी भाँति केवल इन्द्रियभोगोंके भोगके लिये ही नहीं भेजा है। तुम्हें उस बहुत बड़ी सफलताको प्राप्त करना है, जिससे अबतक तुम वंचित रहते आये हो। वह सफलता है—भगवत्प्राप्ति।
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याद रखो—इसी सफलताको लक्ष्य बनाकर जो मनुष्य निरन्तर भगवान्में मन रखकर ही जगत्के कार्य करता है, उनमें कभी मनको फँसाता नहीं है—वही चतुर है। जीवन-निर्वाहके लिये जो काम आवश्यक हो, उसे करो, पर करो भगवान्को याद रखते हुए ही, लक्ष्यपर दृष्टि रखकर ही।
याद रखो—भगवान्से विरोधी विषयको भूलकर भी ग्रहण करना बहुत बड़ी हानि है। अतएव वही बात सोचो, वही काम करो; जो शुभ है। शुभ वही है जो भगवान्के अनुकूल है। आँखोंसे कभी बुरी चीजें, गंदे दृश्य, स्त्रियोंके हाव-भाव मत देखो; कानोंसे कभी गंदी बात मत सुनो; जीभसे कभी गंदे—अशुभ शब्द मत उच्चारण करो। आँखोंसे भगवत्सम्बन्धी वस्तुओं और संतोंको देखो, कानोंसे भगवत्-गुणगान श्रवण करो और जीभसे भगवान्के नाम-गुण-लीला, धाम, तत्त्व और महत्त्वका वर्णन करो। ऐसा करनेपर ही तुम जीवनकी सफलताको प्राप्त कर सकोगे।