क्षणभंगुर जीवन

देखो—जीवन क्षणभंगुर है। अभी है, क्षणभर बाद रहेगा या नहीं, पता नहीं। यहाँकी सभी चीजें ऐसी ही हैं; फिर किस मोहमें पड़कर इस छोटे-से जीवनके लिये इतनी गहरी नींव खोद रहे हो?

सोचो—कितने बड़े-बड़े धनी-मानी-ऐश्वर्यवान् और कीर्तिमान् पुरुष चले गये। क्या उनके साथ यहाँकी एक भी चीज गयी? फिर क्यों इन नश्वर चीजोंके संग्रहकी चिन्तामें अपना जीवन खो रहे हो?

विचार करो—रावण-से प्रतापी, हिरण्यकशिपु-से विश्वविजयी और सहस्रार्जुन-सरीखे हाथोंपर धरतीको तौलनेवाले वीर मौतके शिकार हो गये। फिर तुम किस बलपर, किस सिद्धिके लिये जगत‍्के प्रलोभनमें पड़े इधर-उधर भटक रहे हो।

याद करो—तुम्हारे पिता-पितामहका घरमें कितना रोब-दाब था। घरके सब लोग उनसे संकोच करते थे, डरते थे, उनकी आज्ञाके विरुद्ध कोई चूँतक नहीं करता था। आज कहाँ है उनका वह प्रभुत्व? उनकी कोई याद भी नहीं करता। यही दशा तुम्हारी होगी। फिर क्यों इस घरके पीछे पागल हो रहे हो?

देखो—तुम्हारा यह यौवन, यह रूप, यह सम्मान और यह धन सदा नहीं रहेगा। ये सभी वस्तुएँ नष्ट होनेवाली हैं और तुमसे निश्चय ही इनका वियोग होगा। फिर क्यों इनके लिये चक्‍करमें पड़े पिस रहे हो?

सोचो—यहाँकी दो दिनकी जिंदगीमें तुम्हारा बड़ा नाम हो गया या तुम्हें लोग बहुत मानने लगे तो क्या हुआ? तुम्हारा यह शरीर और यह नाम—जिसको लोग पूजते हैं और मानते हैं, कितने दिनका है? फिर क्यों, इस नाम-रूपकी प्रतिष्ठामें अपनेको बर्बाद कर रहे हो?

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विचार करो—तुम्हारा जीवन तभी सफल होगा जब तुम इस जन्म-मृत्युके भयानक चक्रसे छूटकर अक्षय परम शान्तिको प्राप्त कर लोगे। असलमें उसी सनातनी शान्तिको पानेके लिये ही तुमने मानव-शरीर धारण किया है। यदि तुम उस ओर नहीं चले तो तुम्हारा जीवन व्यर्थ ही चला जायगा! समय जा रहा है, फिर तुम क्यों नहीं चेत करते?

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याद करो—तुमने गर्भवासमें प्रतिज्ञा की थी और रो-रोकर प्रभुसे कहा था कि ‘इस जीवनको मैं तुम्हारे ही भजनमें लगाऊँगा। दूसरा कोई काम करूँगा ही नहीं।’ अब उस प्रतिज्ञाको भूलकर मिथ्या माया-ममतामें फँसकर फिर उसी भीषण गर्भवासकी यन्त्रणा भोगनेकी तैयारी क्यों कर रहे हो?

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चेतो—शीघ्र चेतो। कहीं जीवनके दिन यों ही असावधानीमें बीत गये तो फिर पछतानेसे कुछ भी काम नहीं निकलेगा। अरे, क्यों हाथ लगे स्वर्ण सुयोगको खो रहे हो?

देखो—अबतक जो भूल हो गयी, सो हो गयी, उसके लिये रोनेसे कोई लाभ नहीं है। जीवनके जितने दिन बाकी हैं, उन्हींको दृढ़ संकल्प करके भगवान‍्के भजनमें लगाकर जीवनको सफल कर लो। ऐसा अवसर बार-बार नहीं मिलनेका। इस परम लाभको प्राप्त करनेमें क्यों इतना आलस्य कर रहे हो।

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सोचो—जबतक शरीर स्वस्थ है, इन्द्रियाँ सशक्त हैं, मन प्रबुद्ध है तथा बुद्धि काम देती है, तभीतक तुम इन्हें अपने लक्ष्यकी ओर लगाकर जीवनको सफल करनेका प्रयत्न कर सकते हो। इन सबके असमर्थ होनेपर कुछ भी नहीं कर सकोगे। फिर क्यों देर कर रहे हो?