सब कुछ भगवान‍्का हो गया

विश्वास करो—निश्चय करो—मुझपर भगवान‍्की अनन्त कृपा है। भगवत्कृपाकी अनवरत वर्षा हो रही है। मेरा तन-मन, मेरा रोम-रोम भगवत्कृपासे भींगकर तर हो गया है। मैं भगवत्कृपाके सुधासागरमें निमग्न हो रहा हूँ। मेरे ऊपर-नीचे, दाहिने-बायें, बाहर-भीतर, सर्वत्र भगवत्कृपा भरी है। मैं सब ओरसे भगवत्कृपासे सराबोर हो रहा हूँ।

निश्चय करो—भगवत्कृपाकी बाढ़से मेरा सारा मैल धुल गया है, पाप-तापका सारा कूड़ा-कचरा बह गया है। काम-क्रोध, लोभ-मोह, मद-मत्सर, दम्भ-अभिमान, ईर्ष्या-वैर सब नष्ट हो गये हैं। भगवत्कृपाके रहते मल-विक्षेप मेरे अंदर नहीं रह सकते।

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निश्चय करो—भगवत्कृपाके प्रभावसे मेरे अंदर समता, शान्ति, अनासक्ति, ज्ञान और प्रेम बढ़े जा रहे हैं।

निश्चय करो—अब मेरे मनमें कोई भी बुराई धँस नहीं सकती, मेरी वाणीमें कभी मिथ्या और कटुताका विष आ नहीं सकता, मेरी कोई भी इन्द्रिय कभी भगवद्विमुख होकर चल नहीं सकती।

निश्चय करो—अब मेरा मन भगवान‍्के स्मरण-चिन्तनको, भगवान‍्के मधुर-मनोहर स्वरूपके ध्यानको कभी क्षणभरके लिये भी छोड़ नहीं सकता, मेरी वाणी भगवान‍्के नाम-गुणगानसे कभी विलग नहीं हो सकती और मेरा शरीर उनकी सेवासे कभी चूक नहीं सकता।

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निश्चय करो—मैं भगवान‍्का हो गया हूँ और भगवान् मेरे हो गये हैं। हमारा यह सम्बन्ध अच्छेद्य और अटूट है। अब कभी भी मैं भगवान‍्से विमुख और भगवान् मुझसे अलग नहीं हो सकते।

निश्चय करो—अब यह शरीर, मन, इन्द्रियाँ सब कुछ भगवान‍्के हो गये हैं। अब इनके द्वारा जो कुछ भी होगा, भगवान‍्की प्रेरणासे, उन्हींकी शक्तिसे, उन्हींके मंगलमय संकल्पसे होगा। अतएव वह स्वाभाविक ही परम मंगलमय होगा। अब इस शरीरसे मंगलकार्य ही होंगे, मनसे मंगल-चिन्तन ही होगा और इन्द्रियोंसे मंगलका ही ग्रहण होगा।

निश्चय करो—मंगल एकमात्र मंगलमय भगवान् और मंगलमय भगवान‍्की मंगलमय लीला ही है। मंगलमय भगवान‍्को भुलाकर जो कुछ भी है, वह तो सर्वथा अमंगलस्वरूप ही है। अत: अब अमंगल मेरे समीप कभी आ ही नहीं सकता।

निश्चय करो—अब वैराग्य, शान्ति, समता, प्रेम और आनन्द मुझसे कभी विलग नहीं हो सकते; क्योंकि अब भगवान् कभी मुझसे विलग नहीं होंगे और ये सब सद्भाव और सद‍्गुण भगवान‍्के साथ वैसे ही नित्य रहते हैं, जैसे सूर्यके साथ प्रकाश रहता है।

निश्चय करो—मेरा चित्तभवन भगवान‍्से भर गया है, अब उसमें अन्य किसी भी वस्तुके लिये जगह ही नहीं रही।

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निश्चय करो—‘मैं’ और ‘मेरा’ सब कुछ अब प्रभुका हो गया है। अब ‘मैं’ और ‘मेरे’ पर मेरा जरा भी अधिकार नहीं रह गया है। इनको अब एकमात्र प्रभु ही अपने इच्छानुसार बरतते हैं।