सांसारिक पदार्थ अनित्य हैं
याद रखो—सांसारिक पदार्थ अनित्य हैं और सुखसे रहित हैं, इनपर जो आस्था करता है, इनसे जो सुख-शान्तिकी आशा रखता है, उसे निराश और दु:खी ही होना पड़ता है। सम्भव है, मोहवश कुछ समयके लिये सांसारिक पदार्थ सुख-शान्तिके लिये पर्याप्त जान पडे़ं, पर एक दिन अवश्य ऐसा आता है, जब ये मझधारमें छोड़कर जवाब दे बैठते हैं।
••••
याद रखो—एक भगवान् ही ऐसे हैं, जो नित्य अपरिवर्तनशील, सत्, सनातन, सर्वैश्वर्यपूर्ण, सर्वशक्तिमान् और स्वभाव-सुहृद् हैं, जिनपर विश्वास करनेवालोंको कभी निराश और दु:खी नहीं होना पड़ता। मनुष्यका यह भगवत्-विश्वास उसे भगवान्के अनन्त स्नेह, ज्ञान, शक्ति और प्रेमके उस परम उच्च स्तरपर पहुँचा देता है, जहाँ निराशा, दु:ख और अशान्तिकी कल्पनाका भी लेश नहीं है।
••••
याद रखो—भगवान्में विश्वास रखनेवाले पुरुषपर किसी भी सांसारिक परिस्थितिका कोई प्रभाव नहीं पड़ता; न वह प्रिय कहलानेवाले पदार्थोंकी और परिस्थितियोंकी प्राप्तिसे हर्षित होता है और न अप्रिय कहलानेवाले पदार्थों और परिस्थितियोंकी प्राप्तिसे दु:खी ही। बड़े-से-बड़ा धक्का भी उसे हिला नहीं सकता।
••••
याद रखो—भगवान्में विश्वास करनेपर भी यदि तुममें कहीं अशान्ति या दु:ख दिखायी देता है तो निश्चय है कि कहीं-न-कहीं तुम्हारे विश्वास करनेमें ही त्रुटि है; उस त्रुटिको दूर करनेके लिये विश्वासपूर्वक प्रभुसे प्रार्थना करो। तुम्हारी त्रुटि दूर हो जायगी और तुम दु:ख एवं अशान्तिका समूल नाश करनेमें समर्थ होओगे।
••••
याद रखो—कहीं भूल हो जानेपर जो मनुष्य उसे तुरंत सुधारनेमें नहीं लग जाता, उसकी भूल स्थायी बनकर स्वभावके रूपमें परिणत हो जाती है और फिर नाना प्रकारके नये-नये विघ्न उत्पन्न करके उसकी निराशाको—फलत: दु:ख एवं अशान्तिको और भी बढ़ा देती है। जहाँ-कहीं निराशाका अन्धकार दिखायी दे, वहीं भगवान्के मंगलमय प्रकाशसे उसे तुरंत हटा दो!
••••
याद रखो—भगवान्के मंगलमय राज्यमें निराशा और असफलताको स्थान नहीं है। ये तो तभी आते हैं, जब हम भगवान्की जगह भोगोंपर विश्वास करने लगते हैं। इस अवस्थामें हमारे दु:ख और अशान्तिकी शृंखला टूटती नहीं, वरं और भी सुदृढ़ हो जाती है। इसलिये निराशा और असफलताका दूरसे भी दर्शन होते ही समझ लो कि तुम्हारा विश्वास भोगोंकी ओर हो गया है और तुरंत उस विश्वासको वहाँसे हटाकर भगवान्में जोड़ दो। फिर देखो, उसी क्षण बल और उत्साहसे हृदय भर जायगा और सफलता सामने दिखायी देगी।
••••
याद रखो—संशय, भय, क्रोध, ईर्ष्या, शोक, विषाद, चिन्ता, उद्वेग आदि दोष भगवान्में विश्वासकी कमीसे आते हैं। भगवान्की महत्ता, सर्वशक्तिमत्ता और सौहार्द-प्रेममें विश्वास होते ही हृदयसे ये सारे दोष उसी क्षण वैसे ही लुप्त हो जाते हैं, जैसे सूर्यके उदय होते ही अन्धकार।
••••
याद रखो—भगवान्के समान सदा सब बातोंको जाननेवाला, तुम्हारे दु:ख-दर्दके मूल तत्त्वको समझने और उसे मिटानेकी शक्ति रखनेवाला, तुम्हारे सारे अभावोंको जानने और उनकी सर्वांगपूर्ण पूर्ति करनेकी शक्ति रखनेवाला, पुकारते ही उत्तर देनेवाला तुम्हारा परम सुहृद्—सदा हित करनेमें तत्पर अन्य कोई भी नहीं है। तुम भगवान्को छोड़कर अन्य किसीमें जो तनिक भी विश्वास-भरोसा रखते हो, यही तुम्हारा मोह है—अज्ञान है एवं सारी विपत्तियोंका मूल है। इसे छोड़कर अपने भगवान्को पहचानते ही तुम्हारे सारे दु:ख-दर्द सदाके लिये नष्ट हो जायँगे और तुम नित्य अनन्त सुख-शान्तिको पाकर कृतार्थ हो जाओगे।