सांसारिक सुख-दु:ख
याद रखो—सांसारिक सुख तुम्हारी उन्नतिका प्रतिबन्धक है, तुम्हारे विकासका वैरी है, तुम्हारे विवेकका नाशक है और तुम्हारे नये पापों और बन्धनोंका कारण है।
याद रखो—सांसारिक सुख तुम्हें सम्पत्तिपर गर्व कराना सिखाता है, तुम्हारी प्रवृत्तियोंको बहिर्मुखी करता है, तुम्हारी यथार्थ दृष्टिपर अज्ञानका पर्दा डाल देता है और तुम्हारे सहज जीवन-प्रवाहका अवरोध करता है।
याद रखो—सांसारिक सुख तुम्हें ऐश्वर्यका गुलाम बनाता है, भविष्यकी सुखकल्पनाके भ्रमजालमें फँसाता है, तुम्हारे हृदयको कलुषित करता है और तुम्हें पतनकी ओर ले जाता है।
याद रखो—सांसारिक सुख तुम्हें ऐश्वर्यका गुलाम बनाता है, भविष्यकी सुखकल्पनाके भ्रमजालमें फँसाता है, तुम्हारे हृदयको कलुषित करता है और तुम्हें पतनकी ओर ले जाता है।
याद रखो—सांसारिक सुख विषयोंमें आसक्ति और कामनाको बढ़ाता है, बुद्धिको भ्रष्ट करता है, दीन और दु:खियोंके प्रति उपेक्षाके भाव जाग्रत् करता है और अधिकारकी प्रबल लालसा उत्पन्न करता है।
याद रखो—सांसारिक सुख दूसरोंकी उन्नतिमें ईर्ष्या उत्पन्न करता है, मोहमुग्ध कर देता है, दूसरोंको मूर्ख और अपनेको बुद्धिमान् माननेके लिये आग्रह करता है और सहज ही श्रेष्ठ पुरुषोंका भी अपमान करवा देता है।
याद रखो—सांसारिक सुख मनुष्यकी दृष्टिको परम साध्यसे हटा देता है, विलास-भ्रममें जोड़ देता है, आत्मशक्तिको छिपा देता है और मानव-जीवनको विफल कर देता है।
याद रखो—सांसारिक सुख तुम्हें धर्मसे हटाता है, ईश्वरसे विमुख करता है; आत्माको अधोगतिमें ले जाता है और नरकोंकी यन्त्रणा भोगनेको बाध्य करता है।
याद रखो—इसके विपरीत सांसारिक दु:ख उन्नतिमें सहायक है, विकासकी ओर ले जाता है, विवेकको जाग्रत् करता है और पापोंका प्रायश्चित्त कराकर बन्धनोंको काटता है।
याद रखो—सांसारिक दु:ख तुम्हें सुकृतियोंपर गर्व करना सिखाता है, तुम्हारी प्रवृत्तियोंको अन्तर्मुखी करता है, यथार्थ दृष्टिको खोलता है और जीवन-प्रवाहको सीधा चलने देता है।
याद रखो—सांसारिक दु:ख तुम्हें मनका स्वामी बनाता है, भविष्यमें सच्चे सुखके साधन बतलाता है, हृदयको पवित्र और उदार बनाता है तथा उत्कर्षकी ओर ले जाता है।
याद रखो—सांसारिक दु:ख वैराग्य और उपरतिको उत्पन्न करता है, बुद्धिको शुद्ध करता है, दीन-दु:खियोंके प्रति सहानुभूतिके भाव जाग्रत् करता है और अधिकारके केन्द्रसे हटाकर कर्तव्यपरायण बनाता है।
याद रखो—सांसारिक दु:ख विनयी और नम्र बनाता है, मोह-निद्रासे जगाता है, दूसरोंके प्रति सद्भाव पैदा करता है और श्रेष्ठ जनोंका सम्मान करना सिखाता है।
याद रखो—सांसारिक दु:ख साध्यका स्मरण कराता है, विलास-भ्रमको भंग कर देता है, आत्मशक्तिको प्रकाशित करता है और मानव-जीवनको सफलताकी ओर ले जाता है।
याद रखो—सांसारिक दु:ख तुम्हें धर्ममें लगाता है, ईश्वरके आश्रयमें ले जाता है, आत्माका उत्थान करता है और नरक-यन्त्रणासे बचाकर सद्गति प्राप्त कराता है।
याद रखो—मोहके कारण ही तुम सांसारिक भोग-सुखोंको चाहते हो और सांसारिक दु:खोंको भयानक मानकर उनसे भागना चाहते हो। विश्वास करो, जो सुख भगवान्का विस्मरण कराकर भगवान्की ओर अरुचि उत्पन्न कर दे, उसके समान कोई भी हमारा शत्रु नहीं है और जो दु:ख विषयोंसे हटाकर भगवान्की ओर लगा दे, उसके समान हमारा कोई मित्र नहीं है। इसी प्रकारके सुख-दु:खोंकी यह बात है और इसी दृष्टिसे सांसारिक सुख-दु:खका निरीक्षण और परीक्षण करके उनसे लाभ उठाना चाहिये।