शुभ निश्चय
निश्चय करो—मैं सर्वशक्तिमान् भगवान्का सनातन अंश हूँ; भगवान्की शक्ति मुझमें भरी है। किसी पाप-तापकी ताकत नहीं, जो भगवान्की शक्तिका सामना कर सके।
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निश्चय करो—मैं सत् हूँ, चेतन हूँ और आनन्द हूँ। मेरी नित्य सत्ताको कोई भी मौत नहीं मिटा सकती। मेरे अखण्ड चित्स्वरूपमें कभी अज्ञान या मोहका प्रवेश नहीं हो सकता और मेरे अनन्त अनामय एकरस आनन्दमें तो कभी कोई रूपान्तर होता ही नहीं।
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निश्चय करो—मेरे नित्य निरामय चित्-स्वरूपपर किसी भी जड पदार्थ या जागतिक स्थितिका कोई भी असर नहीं हो सकता। मेरी अखण्ड शाश्वत शान्तिको कोई भंग कर ही नहीं सकता।
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निश्चय करो—मैं नित्य, निर्मल और अनन्त आनन्दके भण्डार भगवान्का स्व-अंश हूँ। कोई भी रोग, शोक, विषाद, भय, निराशा, दरिद्रता, दुर्भावना और दुराचार मुझमें नहीं रह सकते। मैं सदा नीरोग, सदा प्रसन्न, सदा निर्भय, सदा सम्पन्न, सदा सफल, सदा सद्विचारी और सदा सदाचारी हूँ।
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निश्चय करो—भगवान्का निष्कपट नि:स्वार्थ प्रेम मेरे हृदयमें भरा है। कृपा, सेवा, उदारता, स्वतन्त्रता, समानता, शान्ति, साधुता आदि तो मेरे उस प्रेमके परिकर हैं, जो नित्य-निरन्तर निकल-निकलकर सर्वत्र फैलते और सबको सुख पहुँचाते रहते हैं।
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निश्चय करो—मुझमें कोई अशुभ या अकल्याण है ही नहीं; क्योंकि परम शुभ और परम कल्याणस्वरूप भगवान् सदा मेरे हृदयमें बसते हैं और उसी हृदयको लेकर मैं सदा उन्हीं भगवान्में निवास कर रहा हूँ।
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निश्चय करो—जो भगवान् मुझमें हैं और जिन भगवान्में मेरा निवास है, वही भगवान् सबमें हैं और उन्हीं भगवान्में सबका निवास है। अतएव दूसरा कोई है ही नहीं। भगवान् ही भगवान्में बसकर भगवान्की भागवती-लीला कर रहे हैं।
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निश्चय करो—सत्य, अहिंसा, उत्साह, साहस, शक्ति, शान्ति, ज्ञान, वैराग्य, पुण्य, क्षमा, पवित्रता आदिसे मेरा हृदय सदा पूर्ण रहता है। ये कभी मेरे हृदयसे जा नहीं सकते, क्योंकि ये भगवान्के चरणसेवक हैं और भगवान् एक क्षणके लिये भी कभी मेरे हृदयसे विलग होते नहीं।
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निश्चय करो—मैं कभी बुरा विचार, असत्-संकल्प, पाप-निश्चय और दूसरेके अनिष्टका चिन्तन कर ही नहीं सकता; क्योंकि भगवान्के सान्निध्यके कारण मेरा हृदय सदा सद्विचार, सत्-संकल्प, शुभ निश्चय और परहितके भावसे भरा रहता है।
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निश्चय करो—मैं जगत्में आया हूँ केवल सुख, शान्ति, पुण्य, प्रेम, परमात्माकी भक्ति और भगवान्का अखण्ड ज्ञान पाने और सारे जगत्में वितरण करनेके लिये। यही मेरे जीवनका परम व्रत है।