गर्भपातका परिणाम
गर्भपात करनेवालेकी अगले जन्ममें सन्तान नहीं होती—इस बातको प्रकट करनेवाले अनेक श्लोक ‘वृद्धसूर्यारुणकर्मविपाक’ नामक ग्रन्थमें आये हैं। उनमेंसे कुछ श्लोक इस प्रकार हैं—
पूर्वे जनुषि या नारी गर्भघातकरी ह्यभूत्।
गर्भपातेन दु:खार्ता साऽत्र जन्मनि जायते॥
(४७७।१)
‘जो स्त्री पूर्वजन्ममें गर्भपात करती है, वह इस जन्ममें भी गर्भपातका दु:ख भोगनेवाली होती है अर्थात् उसकी सन्तान नहीं होती।’
वन्ध्येयं या महाभाग पृच्छति स्वं प्रयोजनम्।
गर्भपातरता पूर्वे जनुष्यत्र फलं त्विदम्॥
(६५९। १, ८५६। १, ९२१। १, १८५७। १)
‘कोई स्त्री पूछती है कि मैं इस जन्ममें वन्ध्या (सन्तानहीन) किस कारण हुई, तो इसका उत्तर है कि यह पूर्वजन्ममें तेरे द्वारा किये गये गर्भपातका ही फल है।’
गर्भपातनपापाढॺा बभूव प्राग्भवेऽण्डज।
साऽत्रैव तेन पापेन गर्भस्थैर्यं न विन्दति॥
(११८७।१)
‘हे अरुण! जो पूर्वजन्ममें गर्भपात करती है, इस जन्ममें उस पापके कारण उसका गर्भ नहीं ठहरता अर्थात् वह सन्तानहीन होती है।