‘शिव’ का निवेदन

यह शिव-विचार-तरंगोंका पाँचवाँ भाग है। इसमें ऐसे विचार हैं, जिनमें दु:खरहित अनन्त अखण्ड दिव्य सुखकी सरिताका कल्याण-सुधामय प्रवाह है। पाठक इस सरितामें अवगाहन करें और इसके सुधा-रसका पान करके जीवनमें भगवान‍्का दिव्य भाव प्राप्त करें। यह निवेदन है।