दु:ख क्यों होते हैं?

श्रद्धेय श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार

•  विषय सूची  •

  1. 1 नम्र निवेदन ❯
  2. 2 इन पत्रोंके कुछ चुने हुए विषय ❯
  3. 3 भगवान् सर्वसमर्थ हैं ❯
  4. 4 ईश्वरकी आज्ञाके बिना पत्ता भी नहीं हिलता ❯
  5. 5 भगवदवतारका स्वरूप और हेतु ❯
  6. 6 नरक-भोगके बाद फिर भोग-योनि क्यों? ❯
  7. 7 मृत्युके बादके शरीर और श्राद्ध-तर्पण ❯
  8. 8 गया-श्राद्धसे पितरोंकी तृप्ति ❯
  9. 9 जगत‍्का स्वरूप ❯
  10. 10 उन्नतिकी ओर या अवनतिकी ओर ❯
  11. 11 अभी तो जगत् पतन तथा दु:खकी ओर ही जा रहा है ❯
  12. 12 कल्प-भेदसे अवतार-भेद ❯
  13. 13 श्रीकृष्णका स्वरूप-तत्त्व ❯
  14. 14 सौन्दर्य-लालसा ❯
  15. 15 भगवान‍्का दिव्य रूप-सौन्दर्य ❯
  16. 16 भगवान‍्के दिव्य आयुध ❯
  17. 17 प्रियतमका मधुर मिलन ❯
  18. 18 निष्कामताका स्वरूप ❯
  19. 19 निष्काम कर्मका स्वरूप ❯
  20. 20 अभिनेताकी भाँति अपना पार्ट कीजिये ❯
  21. 21 कर्मका उत्तरदायित्व कर्तापर है ❯
  22. 22 न्यायोचित चेष्टा अवश्य करनी चाहिये ❯
  23. 23 मनुष्य कर्म करनेमें स्वतन्त्र है ❯
  24. 24 पाप-पुण्यकी परिभाषा ❯
  25. 25 प्रारब्ध और पुरुषार्थ ❯
  26. 26 तकदीर और तदबीर ❯
  27. 27 नवीन प्रारब्ध ❯
  28. 28 अपने दोषोंसे ही दु:ख होता है ❯
  29. 29 मानव-धर्म ❯
  30. 30 शीघ्र भगवत्प्राप्ति कैसे हो? ❯
  31. 31 भगवान‍्के लिये व्याकुलताका अभाव ❯
  32. 32 भगवद्भक्तिसे हानि नहीं होती ❯
  33. 33 भावका भगवान‍्में अर्पण ❯
  34. 34 भगवत्पूजामें भावकी प्रधानता ❯
  35. 35 छ: दोष और छ: गुण ❯
  36. 36 कुछ प्रश्नोत्तर ❯
  37. 37 रोगको मारो, रोगीको नहीं ❯
  38. 38 मौनका स्वरूप और प्रभुकी प्रसन्नताका उपाय ❯
  39. 39 बुद्धिमानी किसमें है? ❯
  40. 40 कुसंगका अवश्यम्भावी फल ❯
  41. 41 किस काममें जल्दी करे और किसमें न करे ❯
  42. 42 दस प्रकारके मनुष्य ❯
  43. 43 आजके मठ और आश्रम ❯
  44. 44 घर छोड़ना ठीक नहीं ❯
  45. 45 उत्तम बर्तावके साधन ❯
  46. 46 भगवान‍्का लीलाविलास ❯
  47. 47 शिवधनुष चिन्मय था ❯
  48. 48 सन्ध्योपासन अवश्य करना चाहिये ❯
  49. 49 मानस भावोंका विकृतरूपसे प्रकाश ❯
  50. 50 चेष्टाओंसे स्वभावज्ञान ❯
  51. 51 भगवान‍्के सामने निर्दोष रहें ❯
  52. 52 मृत्युपर शोक नहीं करना चाहिये ❯
  53. 53 स्त्रीसंगका त्याग आवश्यक है ❯
  54. 54 घरमें रहकर भजन कीजिये ❯
  55. 55 अपनी कमजोरी भी भगवान‍्के अर्पण कर दें ❯
  56. 56 अपनी स्थितिके अनुसार ही कार्य करना चाहिये ❯
  57. 57 त्याग-तपस्या ही धर्म है ❯
  58. 58 एक दीर्घजीवी महात्मा ❯
  59. 59 काल करै सो आज कर ❯
  60. 60 व्यक्तिपूजन ❯
  61. 61 भगवान‍्की आवश्यकता ❯
  62. 62 दुर्गामाताकी कृपा ❯
  63. 63 शास्त्रका उद्देश्य ❯
  64. 64 आप्तपुरुष और आप्तवाक्य ❯
  65. 65 भगवान् और भजनके सम्बन्धमें कुछ प्रश्नोत्तर ❯
  66. 66 ईश्वरका बोध ईश्वर-कृपासे ही होता है ❯
  67. 67 सबके एकमात्र गुरु श्रीभगवान् ही हैं ❯
  68. 68 कुछ प्रश्नोत्तर ❯
  69. 69 भगवान‍्का स्मरण महान् पुण्य है ❯
  70. 70 धर्म क्या है? ❯
  71. 71 संयम और सदाचारसे जीवका कल्याण ❯
  72. 72 स्वधर्मे निधनं श्रेय: ❯
  73. 73 भगवान‍्का स्वरूप ❯
  74. 74 सनातन वर्णाश्रमधर्म ❯
  75. 75 अनन्यता ❯
  76. 76 पुरानी बुरी आदत कैसे छूटे? ❯
  77. 77 भगवान‍्के सामने सच्चे रहिये ❯
  78. 78 अच्छे और बुरे विचार ❯
  79. 79 सर्वोत्तम हिंदू-संस्कृति ❯
  80. 80 अपनी संस्कृतिके प्रति घृणा ❯
  81. 81 शरणार्थियोंके प्रति हमारा कर्तव्य ❯
  82. 82 दु:खी भाइयोंके प्रति हमारा कर्तव्य ❯
  83. 83 कुछ जाननेयोग्य बातें ❯
  84. 84 विकार क्या है? ❯
  85. 85 दो प्रकारके पापी ❯
  86. 86 दिन-रात भगवद्भजन कैसे हो? ❯
  87. 87 श्रीकृष्ण ही पुरुषोत्तम-तत्त्व हैं ❯
  88. 88 खर्च घटनेका उपाय—सादगी ❯
  89. 89 भगवान‍्का मंगलविधान ❯
  90. 90 भगवद्दर्शनके साधन ❯
  91. 91 भगवान् शंकर और श्रीकृष्ण एक ही हैं ❯
  92. 92 पापसे छूटनेका उपाय ❯
  93. 93 भाईसे प्रेम करें ❯
  94. 94 मित्र और सुहृद्के लक्षण ❯
  95. 95 पुराणोंकी वास्तविकता ❯
  96. 96 कठोर व्रत है पर उसीको निभाना है ❯
  97. 97 ईश्वर नित्यसिद्ध है ❯
  98. 98 दु:ख क्यों होते हैं? ❯