अपनी कमजोरी भी भगवान‍्के अर्पण कर दें

सादर हरिस्मरण। आपका पत्र मिला था। उत्तर देरसे लिखा जा रहा है। कार्याधिक्यसे ऐसा हो जाया करता है। आप अपने कमरेमें भगवान् श्रीकृष्णकी तसवीर रखकर उनके सामने बैठी रोती हैं। उनके प्रति आपके मनमें मातृभाव उमड़ रहा है। सो बड़ी अच्छी बात है। माता श्रीकौसल्याजी और माता श्रीयशोदाजीके चरित्रोंको पढ़िये। इससे आपको विशेष लाभ होगा। आपका सौभाग्य है जो आपके हृदयमें ऐसे भाव आते हैं। परंतु आपने जिस एक कमजोरीकी बात लिखी है, उससे पता लगता है कि अभी आपके मनमें छिपे चोरोंका अस्तित्व है। उन चोरोंसे सावधान रहिये एवं अपनी इस कमजोरीको भी भगवान् श्रीकृष्णके चरणोंमें अर्पित कर दीजिये। आपका अर्पण ठीक होगा तो आपकी कमजोरीको भी वे ही ले लेंगे।