घर छोड़ना ठीक नहीं
आपने अपने चित्तकी जो स्थिति लिखी है, उसे देखते हुए मैं आपको घर छोड़नेकी सलाह तो किसी प्रकार नहीं दे सकता। साथ ही ऐसी स्थितिमें विवाह करनेकी जल्दी करना भी ठीक नहीं होगा। जबतक चित्त एक ओर न हो जाय, तबतक दोनोंमेंसे कोई भी काम करना उचित नहीं है। आपकी जो किसीसे नहीं पटती और आप मनमानी कर बैठते हैं—यह कोई गुण नहीं है। संसारमें रहें अथवा वनमें जायँ—आपका स्वभाव तो ऐसा होना चाहिये जिससे सभी लोग आपसे प्रेम करें। मेरे विचारसे आपको अच्छे सत्पुरुषोंका संग करनेकी बड़ी आवश्यकता है। वे संत चाहे गृहस्थ हों, चाहे विरक्त। सदाचारका दृढ़तासे पालन कीजिये। आपका सबसे बड़ा तप यही होगा कि अब भविष्यमें आपसे कोई पाप न हो। अंग्रेजी पढ़नेमें कुछ भी बुराई नहीं है। मैं तो आपको यही सलाह दूँगा कि आप अभी अपनी पढ़ाई जारी रखें और कम-से-कम बी०ए० पास अवश्य कर लें। यह अवश्य है कि पढ़ाई करें अथवा व्यापार, कुसंग और कुकर्मोंसे सदा दूर रहें। अंग्रेजी पढ़े-लिखोंमें तो बड़े-से-बड़े चरित्रवान् और सद्गुणसम्पन्न पुरुष मिलते हैं। महात्मा गाँधी और पं० श्रीमदनमोहन मालवीय अंग्रेजी पढ़े विद्वानोंमें ही हैं। अध्ययनसे आपकी बुद्धिका विकास होगा और आप अपना हिताहित समझ सकेंगे।
यदि विवाह करने और विरक्त होने—इन दो स्थितियोंमेंसे एकको चुनना ही है तो मैं आपको विवाह करनेकी ही सलाह दूँगा। विरक्त जीवनके लिये जिन गुणोंकी आवश्यकता होती है, इस कच्ची आयुमें उनका होना बहुत ही कठिन है। जिनमें सच्चा वैराग्य, गम्भीर विचार और पूर्ण तितिक्षा हो, वे ही विरक्त होकर आनन्दित हो सकते हैं। किसी प्रकारकी उत्तेजना, आलस्य या आपत्तियोंसे ऊबकर घर छोड़नेवालोंको तो सर्वदा पछताना ही पड़ता है। वे घर छोड़कर और भी अधिक गिर जाते हैं। अत: आप अपनी इस वर्तमान स्थितिमें घर छोड़नेकी भूल कभी न करें और अधिक क्या लिखूँ। आशा है, आप मेरी प्रार्थनापर ध्यान देकर घर छोड़नेकी गलती कभी न करेंगे। शेष भगवत्कृपा।