घरमें रहकर भजन कीजिये
सादर हरिस्मरण। आपका कृपापत्र मिला। आप भगवत्-साक्षात्कारके लिये क्या त्याग करना चाहते हैं—यह आपने नहीं लिखा। यदि आप सच्चे संतोंका संग करेंगे और भगवद्भजन करना चाहेंगे तो आपका कोई विरोध नहीं करेगा। आरम्भमें कुछ विरोध हो सकता है; किंतु फिर सब शान्त हो जायँगे।
परंतु कई बार देखा गया है कि भजन और सत्संगके नामपर कोई-कोई नवयुवक क्षणिक आवेशमें आकर व्यर्थ अपने घरवालोंको तंग करते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिये। यदि भजनकी सच्ची लगन है तो उसे दबानेकी जरूरत नहीं है। भजन करते हुए घरवालोंकी यथेष्ट सेवा कीजिये। उनके प्रति भी आपका कर्तव्य है तथा उनकी सेवा भी श्रीभगवान्की ही सेवा है। ऐसे भावसे जो भजन एवं सेवा करते हैं, वे अपना और घरवालोंका, दोनोंका कल्याण कर सकते हैं। शेष भगवत्कृपा।