पापसे छूटनेका उपाय

प्रिय महोदय! सप्रेम हरिस्मरण। आपका पत्र मिला। आपने लड़कपनसे लेकर अबतककी अपने जीवनकी पाप-प्रवृत्तिका हाल लिखा, उसे पढ़कर खेद हुआ। सचमुच आपकी पत्नी बड़ी साध्वी थी, जो आपको इस पापसे छूटनेके लिये समझाया करती थी। जो कुछ भी हो, अब तो आपकी उम्र भी अधिक हो चुकी है। आप सच्चा पश्चात्ताप करके दीनबन्धु पतितपावन भगवान‍्की शरण ग्रहण कीजिये। उन्हींको एकमात्र शरण्य, त्राणकर्ता और आश्रयदाता मानकर उनके चरणोंपर अपनेको डाल दीजिये तथा दिन-रात अविराम भगवन्नाम-जपका अभ्यास कीजिये। भगवदाश्रय और भगवन्नामसे पापोंका समूल नाश हो जाता है, यह निश्चित है। पर यह करना तो होगा आपको ही। शेष भगवत्कृपा।