उन्नतिकी ओर या अवनतिकी ओर
सादर सप्रेम हरिस्मरण! आपका कृपापत्र मिला। आपने लिखा कि ‘जगत्के बड़े-बड़े विचारशील विद्वानोंने यह माना है कि मानव-समाज उत्तरोत्तर उन्नत हो रहा है; फिर आप कैसे कहते हैं कि वर्तमानमें मानव-समाजकी उन्नति नहीं हो रही है, बल्कि वह बड़ी तीव्र गतिसे अवनतिके गर्तमें गिरा जा रहा है।’ इसके सम्बन्धमें बहुत-सी बातें आपको पहले पत्रमें लिखी जा चुकी हैं। आज जो लोग जगत्में उत्तरोत्तर उन्नति देख रहे हैं, उनका लक्ष्य सदाचार, सद्भाव तथा सत्कर्म एवं सबके मूल श्रीभगवान्की ओर नहीं है और न वे भगवान्की प्राप्तिको मानव-जीवनका मुख्यतम लक्ष्य ही मानते हैं। उनका लक्ष्य है—भौतिक उन्नति। आज जो तार, बेतारका तार, रेडियो, मोटर, हवाई जहाज, विद्युत्-शक्ति और परमाणु-शक्ति आदिके आविष्कारसे मनुष्यकी शक्ति बढ़ गयी है, इसीको वे उन्नति मानते हैं। अवश्य ही विज्ञानकी उन्नति हुई है; पर उसका प्रयोग किस प्रकार और किस कार्यमें हो रहा है—इसपर विचार करनेसे स्पष्ट पता लगता है कि विज्ञानने जहाँ यातायात, संवादवहन आदिमें सुविधा कर दी है, वहाँ उसने मानव-जगत्के संहारमें भी बहुत बड़ी सहायता की है। इसका कारण विज्ञान नहीं है—इसका कारण है मनुष्यकी मानसिक वृत्ति। उसी परमाणु-शक्तिसे—यदि जगत्के हितकी इच्छा हृदयमें भरी हो तो बड़ा हित-साधन हो सकता है और मनमें द्वेष-द्रोह तथा वैर-विरोध रहनेके कारण उसीके प्रयोगसे लाखों जापानी कुछ ही क्षणोंमें कालके गालमें पहुँच गये और आज भी सारा जगत् उसकी भयानकतासे सशंकित है। इसपर भी सुना यही जाता है कि अमेरिका और रूसके वैज्ञानिक उससे भी अधिक भयानक किसी शक्तिके आविष्कारमें लगे हैं। पता नहीं, इसका कितना भीषण परिणाम होगा।
वस्तुत: उन्नति तभी समझी जाती है, जब मनुष्यका मन केवल दैवी सम्पत्तियोंका ही निवासस्थान बन जाय, सभी सबका सुख तथा कल्याण चाहने लगें। घृणा और द्वेषके बदले प्रत्येक व्यक्तिके हृदयमें आत्मीयता और प्रेम आ जाय, स्वार्थ और अधिकारकी जगह त्याग और कर्तव्यको स्थान मिल जाय एवं क्रोध तथा हिंसाकी जगह क्षमा और साधुता ग्रहण कर लें। जिस युगमें ऐसी बातें होती हैं, वही युग उन्नतिका युग माना जाता है; इसीलिये हिंदू-शास्त्र ऐसे युगको सत्ययुग कहते हैं और यह कालचक्रके अनुसार अपने-आप आया करता है। इस समय कलियुगका प्रारम्भ है और शास्त्रोंके अनुसार अवनतिका समय है। सत्ययुगमें जहाँ धर्मके चार पाद होते हैं, वहाँ कलियुगमें केवल एक पाद रह जाता है। सत्ययुगमें मनुष्यकी स्वाभाविक प्रवृत्ति धर्मानुष्ठानकी ओर रहती है और कलियुगमें भोगोंकी ओर रहती है। भोगकामना जब बढ़ जाती है, तब मनुष्य अधर्मका आश्रय लेकर पाप-कर्ममें लग जाता है और परिणामस्वरूप जगत्की अधोगति हो जाती है।
आजका जगत् जिस सभ्यताकी ओर बढ़ रहा है, उसमें असत्य, लूट-पाट, चोरी, व्यभिचार, अनाचार, छल-कपट, व्यक्तिवाद, अधिकारलिप्सा, उच्छृंखलता, द्वेष, द्रोह, पीड़न, शोषण, हिंसा, नृशंसता आदि दुर्भाव और दुराचार द्रुतगतिसे बढ़ रहे हैं और इसको भी उन्नति ही माना जा रहा है। कुछ विचारशील पाश्चात्य विद्वानोंने भी इस सभ्यताका खोखलापन देखा है और वे कहने लगे हैं कि यह मानव-जातिका विनाश करके ही छोड़ेगी। श्रीरोमां रोलांने कहा है कि ‘पाश्चात्य सभ्यता एक आग्नेय पर्वतकी गुफाके बगलमें आ पहुँची है—वह किसी भी क्षण ध्वंस हो जा सकती है।’
विज्ञानकी उन्नतिने विलास, आरामतलबी, दुराचार, दुर्नीति, निष्ठुरता और हिंसाको बेहद बढ़ा दिया है। मानवकी मानवता ही आज मरणासन्न है और जबतक भगवान् तथा धर्मका आश्रय और कर्म-फलभोगका भय नहीं होगा, तबतक किसी भी वाद-प्रवर्तन, राज्य-परिवर्तन या नवीन पद्धतिके निर्माणसे यह पतनका प्रवाह नहीं रुक सकता। अवश्य ही इस पतनोन्मुखी कलियुगमें भी वे व्यक्ति सुरक्षित रह सकते हैं, जो भगवान् तथा धर्मका आश्रय लेकर अपने किये हुए कर्मोंके फलभोगमें विश्वासी हैं और इसलिये भगवत्प्रीत्यर्थ सत्कर्म ही करते हैं, परंतु आज जिस गतिसे यह पतनका प्रवाह चल रहा है, उसको देखते तो यही प्रतीत होता है कि अभी जगत्में उच्छृंखलता और स्वेच्छाचारिता बढ़ेगी और सहज ही परिणाममें दु:ख भी बढ़ेगा।
इस पतनके प्रवाहको उन्नति समझना तथा बतलाना ही यह सिद्ध करता है कि मनुष्य आज पतनकी उस अवस्थाको पहुँच गया है कि जहाँ उसकी विवेककी आँखें ही बदल गयी हैं और वह बड़े गर्वके साथ अनिष्टको इष्ट और अधर्मको धर्म बतला रहा है। यही तामसी बुद्धि है, जो समस्त अर्थोंको विपरीत बतलाती है और ‘जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसा:’ इस भगवद्वाक्यके अनुसार तमोगुणी वृत्तिमें स्थित लोग नीच गतिको ही प्राप्त होते हैं। इससे सिद्ध है कि इस समय जगत् अवनतिकी ओर जा रहा है। उन्नतिकी पहचान है— मानव-मनकी पवित्रता, सुख, शान्ति और साथ ही दैहिक सुख-समृद्धिकी सात्त्विक वृद्धि। अवनतिकी पहचान है—मानव-मनकी अपवित्रता, विषाद, अशान्ति और साथ ही दैहिक दु:ख-दैन्यकी तामसी वृद्धि। इस समय जगत्में कौन-सी अधिक बढ़ रही है, इसे आप प्रत्यक्ष देख सकते हैं।