भक्तिकी भावना

भगवान् नित्य मेरे साथ हैं, मुझे अकेले किसी परिस्थितिका सामना करनेकी आवश्यकता नहीं। चाहनेपर भगवान‍्का प्रेमभरा एवं विवेकपूर्ण परामर्श मेरे लिये प्रस्तुत है। उनका साहाय्य अबाध तथा सदा विजयी है। भगवान् अन्तर्यामीरूपमें नित्य मुझमें अवस्थित हैं। मैं अपनी किसी भी आवश्यकताके लिये भगवान‍्के साहाय्यपर निर्भर कर सकता हूँ—इस ज्ञानसे मैं सदा अविचलित हूँ।

मैं प्रतिदिनकी छोटी-छोटी समस्याओंको सुलझानेमें भी भगवान‍्की सहायता चाहता हूँ। जब कभी मेरी आवश्यकता तीव्र होती है, अथवा जीवनमें कोई विकट स्थिति उपस्थित होती है, तब मैं भगवान‍्से सहायता चाहता हूँ। मेरी आवश्यकता छोटी है या बड़ी, मैं इस बातका विचार किये बिना ही अन्तर्मुख हो भगवान‍्की सहायता चाहता हूँ। भगवान् मुझे शक्ति देते हैं और विचलित होते हुए साहसके समय मुझे बल देते हैं। उनका ज्ञान मुझे अपने सामने आयी प्रत्येक समस्याको सुलझानेमें मार्गदर्शन करता है। भगवान‍्का प्रकाश मेरे ग्रहण करनेयोग्य मार्गको मेरे सामने अनावृत्त करके रख देता है, अतएव मेरे निश्चय करनेमें संदेह अथवा हिचकका कोई कारण नहीं।

मुझे भगवान‍्से केवल इस निश्चयकी प्राप्तिके लिये कि भगवान् अन्तर्यामीरूपमें नित्य मुझमें अवस्थित हैं और प्रत्येक आवश्यकतामें वे मेरी सहायता करते हैं, प्रार्थना करनेकी आवश्यकता है।

भगवान् मेरी शरण एवं शक्ति हैं, आवश्यकताके समय तत्काल अचूकरूपमें प्राप्त होनेवाली सहायता हैं।