आत्महत्याका विचार छोड़कर भगवान्का भजन कीजिये
प्रिय महोदय, सप्रेम हरिस्मरण। ‘आपके भाई आपके पूजा-पाठमें विघ्न डालते हैं और आप जिस जातिमें हैं, उसमें आपकी कोई इज्जत नहीं।’ इसलिये आप आत्महत्या करना चाहते हैं सो यह आपकी भूल है। आप मन-ही-मन गुप्तरूपसे भगवान्की मानसिक भक्ति-पूजा और जिह्वासे सदा भगवान्का नाम-जप कीजिये, आपको कौन रोक सकता है? रही जातिकी बात, सो भगवान्के यहाँ जातिका कोई महत्त्व नहीं है—
‘जाति पाँति पूछै ना कोई।
हरि को भजै सो हरि का होई॥’
—प्रसिद्ध है। नीची या वर्णसंकर जातियोंमें बहुत बड़े-बड़े महात्मा हो चुके हैं। भगवान्की भक्तिमें सबका अधिकार है और सच्ची भक्तिके प्रतापसे किसीको भी परमात्माकी प्राप्ति हो सकती है। अत: आप आत्महत्याका विचार सर्वथा छोड़कर भगवान्की भक्ति कीजिये।