भगवद्विश्वाससे रोगनाश

प्रिय बहिन! सादर हरिस्मरण। आपका पत्र मिला। आपने लिखा कि आपके पतिदेव पागल हो गये; आपके दो बच्चे हैं; और घरवालोंका बर्ताव जितना अच्छा होना चाहिये, उतना अच्छा नहीं है। आपका चित्त बहुत व्यथित है। कोई सहारा देनेवाला नहीं है। भगवान् सुनते नहीं हैं। सो वास्तवमें ऐसी स्थितिमें आपको दु:ख होना स्वाभाविक है। जिसपर विपत्ति पड़ती है, वही जानता है; परन्तु आपने जो यह लिखा कि भगवान् सुनते नहीं हैं, यह भूलसे लिखा है। भगवान् सुनते हैं और खूब सुनते हैं। भगवान् पर विश्वास होना चाहिये। आप ऐसा विश्वास कीजिये कि ‘भगवान् मेरी सुन रहे हैं, मेरा मनोरथ अवश्य सफल होगा, मेरे पतिदेव निश्चय ही अच्छे होंगे और वे अच्छे होने जा रहे हैं। भगवान‍्की मुझपर बड़ी कृपा है। उनकी कृपासे मेरे सारे दु:ख-कष्ट निश्चय ही दूर हो जायँगे।’ इस प्रकार दृढ़ भावना कीजिये और इन विश्वासके वाक्योंको बार-बार दुहराते हुए भगवान‍्से प्रार्थना कीजिये। आपको अवश्य सफलता मिलेगी। भगवान‍्ने गीतामें स्वयं कहा है—

मच्चित्त: सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि।

(१८। ५८)

‘मुझमें मन लगा लो, फिर मेरी कृपासे समस्त संकटों और कठिनाइयोंसे तुम अनायास ही तर जाओगे।’ ..........भगवान‍्के ये वचन सर्वथा ध्रुव सत्य हैं। आप घबराइये मत, न निराश होइये और न भगवान् पर जरा भी अविश्वास कीजिये। भगवान् पर विश्वास न होनेके कारण ही निराशा, शोक, विषाद और चिन्ता होती है। सर्वशक्तिमान् परम सुहृद् मंगलमय भगवान् पर विश्वास करते ही निराशा, शोक, विषाद और चिन्ता मिट जाती है और फिर परिस्थिति भी पलट जाती है। आप विश्वासपूर्वक नित्य प्रार्थना कीजिये। आपकी प्रार्थना सच्ची श्रद्धासे युक्त होगी तो आपके पतिदेवका स्वास्थ्य शीघ्र ही सुधर जायगा।

साथ ही एक दवा कीजिये। ‘धवलबरवा’ नामक एक जड़ी होती है, सभी जगह मिलती है। इसको संस्कृतमें ‘सर्पगन्धा’ कहते हैं। वहाँ न मिलती हो तो पता लिखनेपर हमलोग यहाँसे भेज सकते हैं। यह जड़ी अठन्नीभर सबेरे एक छटाँक गुलाबजलमें भिगो दी जाय और शामको उसमें तीन काली मिर्च मिलाकर उसी जलमें पीसकर उसे बिना छाने ही पिला दिया जाय। इसी प्रकार रातको भिगोकर सुबह पिला देना चाहिये। इससे खूब नींद आयेगी और पागलपन दूर हो जायगा। कमजोरी ज्यादा मालूम दे तो बीचमें एक-दो दिन दवा बन्द कर देनी चाहिये या मात्रा घटा देनी चाहिये। रोगीको पौष्टिक भोजन नहीं देना चाहिये। अमरूद खिलाना बहुत अच्छा है। कुछ दिन दवा देनेपर ही लाभ दिखायी देगा।

सबसे बड़ी दवा है विश्वासके साथ भगवान‍्का नाम लेना। श्रीधन्वन्तरिजीके वाक्य हैं—

अच्युतानन्तगोविन्दनामोच्चारणभेषजात्।

नश्यन्ति सकला रोगा: सत्यं सत्यं वदाम्यहम्॥

‘अच्युत, अनन्त, गोविन्द—इन नामोंके उच्चारणरूपी औषधसे सब रोगोंका नाश होता है—यह मैं सत्य-सत्य कहता हूँ।’

अतएव आप फलमें सन्देहरहित होकर सरल विश्वासके साथ ‘अच्युताय नम:, अनन्ताय नम:, गोविन्दाय नम:’ इन नामोंका जप कीजिये। आपके पतिदेव कर सकें तो उनसे भी कराइये। अवश्य लाभ होगा। लौकिक दु:खनाशका ही नहीं, भयंकर-से-भयंकर भव-रोगके नाशका भी यही सर्वोत्तम उपाय है। इसपर विश्वास कीजिये। विशेष भगवत्कृपा।