भगवान्के चिन्तनसे चिन्ताका नाश होगा
प्रिय महोदय! सप्रेम हरिस्मरण। आपका पोस्टकार्ड मिला। आपको कुछ दिनोंसे बहुत ही चिन्ता है और आपकी वृद्धा माताजी भी रात-दिन चिन्तामें निमग्न रहती हैं। आपकी चिन्ता कब दूर होगी और उसके दूर होनेका उपाय आप पूछते हैं। इसके उत्तरमें निवेदन है कि चिन्ता तभीतक आपमें रह सकती है जबतक आप उसको रखते हैं। सारी चिन्ताओंके दूर करनेवाले सर्वशक्तिमान् भगवान्का चिन्तन कीजिये। वे आपके परम सुहृद् हैं और सदा आपकी सहायता करनेके लिये तैयार हैं। —इस बातपर विश्वास कीजिये।
आपने चिन्ताका कोई कारण स्पष्ट नहीं किया। उचित जान पड़े तो स्पष्ट लिखिये, जिससे उसके नाशके लिये किसी खास उपायपर विचार किया जा सके। विशेष भगवत्कृपा।