गोहत्याके प्रायश्चित्तकी व्यवस्था

सप्रेम हरिस्मरण। पत्र मिला। उत्तरमें निवेदन है कि गोहत्या-सम्बन्धी प्रायश्चित्तकी व्यवस्थाकी विधि यह है कि गाय या बैलके गलेमें मृत्युके समय जो रस्सी रही हो, उसे लेकर वे सब लोग, जिनका उसकी मृत्युसे कुछ भी लगाव समझा जाता हो, किसी अच्छे धर्मशास्त्रके जाननेवाले निष्पक्ष विद्वान् ब्राह्मणके पास जायँ और उनकी आज्ञाके अनुसार विधिपूर्वक विनय एवं श्रद्धाके साथ प्रश्न करें। प्रश्न करते समय भगवान् और गोमाताको प्रणाम करके सारी बातें सच-सच बतला दें। उन बातोंको सुननेके बाद धर्मशास्त्रानुसार जो निर्णय वे दें, उसके अनुसार प्रायश्चित्त किया जाय। आपको भी इस प्रश्नका निर्णय इसी प्रकार करवाना चाहिये। प्रत्येक व्यक्ति ऐसे प्रश्नोंके निर्णयका अधिकार नहीं रखता। धर्मशास्त्रज्ञ एवं धर्मनिष्ठ विद्वान् ब्राह्मणोंको ही इसपर निर्णय देनेका अधिकार है। शेष प्रभुकी कृपा।