परम कल्याण

सप्रेम हरिस्मरण। कृपापत्र मिला, धन्यवाद। आपके प्रश्नका उत्तर इस प्रकार है—

द्वादशाक्षर (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) मन्त्र बड़े महत्त्वका है। उसके जपसे अवश्य कल्याण हो सकता है। प्रतिदिन अधिक-से-अधिक जितना हो जाय, उतना प्रेमपूर्वक जपना चाहिये। यह बताना कठिन है कि कितने दिनोंमें परम कल्याणकी प्राप्ति हो सकती है। यदि परम कल्याणका अर्थ है—भगवान‍्का प्रत्यक्ष साक्षात्कार, तब तो यह साधककी अवस्थापर निर्भर है। अन्यथा जप करनेवालेका परम कल्याण तो अव्यक्तरूपसे होता ही रहता है। प्रतिक्षण होता है। जिस साधकका भगवान‍्में जितना अधिक प्रेम होगा, जो प्रभुके दर्शनके लिये जितना ही आकुल-व्याकुल होगा, उतना शीघ्र उसे भगवान‍्का दर्शन मिल सकता है। यह साधकके अधीन नहीं भगवान‍्की कृपाके अधीन है। आर्तभावसे पुकारनेपर शीघ्र कृपा होती है।