नम निवेदन

श्रीरामचरितमानसके बालकाण्डमें गोस्वामी तुुलसीदासजी महाराजने बड़े सुन्दर ढंगसे नौ दोहोंमें ‘राम’ नामकी वन्दना करते हुए उसकी महिमाका वर्णन किया है। कुछ वर्ष पूर्व हमारे परम श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज ने इस प्रकरणपर प्रवचन दिये थे। अनेक भाई-बहनोंके विशेष आग्रहवश उन्हीं प्रवचनोंको प्रकाशित किया जा रहा है। सगुण और निर्गुण उपासनामें रुचि रखनेवाले सभी साधकोंके लिये यह पुस्तक बहुत उपयोगी है। इसमें भगवन्नामके प्रभावको बहुत ही सरल रीतिसे साधारण बोलचालकी भाषामें समझाया गया है।

सभी साधकोंसे मेरा नम्र निवेदन है कि प्रस्तुत प्रवचन-संग्रहके भाषा-सम्बन्धी दोषोंकी ओर ध्यान न देकर केवल भगवत्प्राप्तिके उद्देश्यसे इनमें कथित विषयका गंभीरतापूर्वक अध्ययन करें। इससे उन्हें अपने साधन-पथपर अग्रसर होनेमें अभूतपूर्व सहायता प्राप्त हो सकती है।