सोलह माताएँ

स्तनदात्री गर्भधात्री भक्ष्यदात्री गुरुप्रिया।

अभीष्टदेवपत्नी च पितु: पत्नी च कन्यका॥

सगर्भजा या भगिनी पुत्रपत्नी प्रियाप्रसू:।

मातुर्माता पितुर्माता सोदरस्य प्रिया तथा॥

मातु: पितुश्च भगिनी मातुलानी तथैव च।

जनानां वेदविहिता मातर: षोडश स्मृता:॥

(ब्रह्मवैवर्तपुराण, गणेश० १५)

‘स्तन पिलानेवाली, गर्भधारण करनेवाली, भोजन देनेवाली, गुरुपत्नी, इष्टदेवताकी पत्नी, पिताकी पत्नी (विमाता), पितृकन्या (सौतेली बहिन), सहोदरा बहिन, पुत्रवधू , सासु, नानी, दादी, भाईकी पत्नी, मौसी, बुआ और मामी—वेदमें मनुष्योंके लिये ये सोलह प्रकारकी माताएँ बतलायी गयी हैं।’