निवेदन

जो हमसे कभी अलग न हो सके और हम जिससे कभी अलग न हो सकें, वह तत्त्व क्या है, उस तत्त्वका अनुभव कैसे हो, उसके अनुभवमें जो बाधाएँ हैं, उनका निवारण कैसे हो—यह विषय परमश्रद्धेय श्रीस्वामीजी महाराज अपने प्रवचनोंमें बड़ी सरलतापूर्वक अनेक प्रकारसे समझाया करते हैं। ऐसे कुछ विशेष प्रवचनोंका संग्रह आवश्यक संशोधनके साथ ‘नित्ययोगकी प्राप्ति’ पुस्तकके रूपमें साधकोंकी सेवामें प्रस्तुत है। इन प्रवचनोंमें साधकोंको साधन तथा साध्यके विषयमें अनेक प्रेरणाप्रद विलक्षण बातें मिलेंगी। साधकोंसे प्रार्थना है कि वे गम्भीरतापूर्वक इस पुस्तकका अध्ययन करके लाभान्वित हों।