प्रार्थना और शरणागति

भगवान‍्से प्रार्थना करना और उनके शरण होना—ये दो बातें तत्काल सिद्धि देनेवाली हैं। कोई आफत आ जाय, दु:ख आ जाय, सन्ताप हो जाय, उलझन हो जाय तो आर्तभावसे ‘हे नाथ! हे प्रभो!’ कहकर भगवान‍्को पुकारे, उनसे प्रार्थना करे तो तत्काल लाभ होता है।