होलीपर कर्तव्य
क्या करना चाहिये—
१-प्रेमसे हलका रंग डालकर होली खेलनेमें हर्ज नहीं है।
२-निर्दोष गायन-वाद्य करनेमें हानि नहीं है। भगवान्के नामका कीर्तन खूब करना चाहिये।
३-वासंती नवसस्येष्टि (वसंतमें पैदा होनेवाले नये धान्यका यज्ञ) करना चाहिये। हवन करना चाहिये।
४-भक्त प्रह्लादकी कथाएँ तथा लीलाएँ होनी चाहिये।
५-भगवन्नामके महत्त्वका प्रचार करना चाहिये।
६-सब प्रकारके वैरको त्यागकर परस्पर प्रेमपूर्वक मिलना चाहिये।
७-फाल्गुन सुदी ११ से १५ तक किसी दिन भगवान्की सवारी निकालनी चाहिये—जिसमें सुन्दर-सुन्दर भजन और नामकीर्तनकी व्यवस्था करनी चाहिये।
८-श्रीश्रीचैतन्यदेवकी जन्मतिथिका उत्सव मनाना चाहिये। महाप्रभुका प्राकट्य होलीके दिन ही हुआ था। इस उपलक्ष्यमें हरिनामकी खूब ध्वनि करनी चाहिये।
९-भक्ति और भक्तकी महिमाके तथा सदाचारके गीत गाने चाहिये।
१०-भगवान्का दोलोत्सव—झूलनोत्सव मनाना चाहिये।
११-निम्नांकित न करने लायक कार्योंको लोग न करें, इसके लिये जगह-जगह सभा करके सबको इनके दोष समझाने चाहिये।
क्या नहीं करना चाहिये—
१-गाली नहीं बकनी चाहिये।
२-राख, धूल, कीचड़ नहीं उछालना चाहिये।
३-गंदे पानीको किसीपर नहीं डालना चाहिये।
४-रंग डालनेसे जिनका मन दुखता हो, उनपर रंग नहीं डालना चाहिये।
५-स्त्रियोंकी ओर गंदे इशारे नहीं करने तथा उन्हें गंदी जबान नहीं बोलनी चाहिये।
६-किसीके भी मुँहपर स्याही, कालिख या नीला रंग आदि नहीं पोतना चाहिये।
७-शराब, भाँग, गाँजा, चरस, नशीला माजून आदि खाना-पीना नहीं चाहिये।
८-वेश्यानृत्य नहीं कराना चाहिये।
९-गंदे-अश्लील धमाल, रसिया, कबीर या फाग नहीं गाने चाहिये।
१०-टोपियाँ या पगड़ियाँ नहीं उछालनी चाहिये।
११-जूतोंकी माला पहनकर या पहनाकर, शव बनाकर गंदे गाने गाते-बजाते हुए जुलूस नहीं निकालना चाहिये।