नम्र निवेदन

पूर्ण-समर्पण के नामसे भगवच्चर्चा भाग-६ का ही यह नवीन संस्करण जनताकी सेवामें सादर प्रस्तुत किया जा रहा है। इसमें अन्यान्य उपयोगी विषयोंके साथ-साथ श्रीमद्भगवद‍्गीताके कई महत्त्वपूर्ण विषयोंपर प्रकाश डाला गया है। गीतोक्त समग्र ब्रह्म या पुरुषोत्तम, गीतोक्त कर्मयोग और आधुनिक कर्मवाद, गीतामें विश्वरूपदर्शन, विषय-चिन्तनसे सर्वनाश और भगवच्चिन्तनसे परम शान्ति, भगवान‍्के आश्वासनपर विश्वास करो इत्यादि ऐसे विषय हैं, जिनके विवेचनसे गीताप्रेमियोंको विशेष लाभ होगा। साथ ही गीताके दो प्रधान पात्रों—भगवान् श्रीकृष्ण और भक्तवर अर्जुनके चरित्रोंका भी दिग्दर्शन कराया गया है, जिनका अनुशीलन गीताके मर्मको समझनेके लिये परमावश्यक है। इसके अतिरिक्त स्वाधीनता या स्वराज्य, विनाशके पथपर, साहित्यका सदुपयोग, आजका भ्रष्टाचार और उससे बचनेका उपाय आदि सामयिक विषयोंका भी बड़े सुन्दर ढंगसे विवेचन किया गया है। आशा है कि ४४ उपयोगी लेखोंके इस संग्रहसे जनता पूरा लाभ उठायेगी।

विनीत

चिम्मनलाल गोस्वामी