नम्र निवेदन
शीघ्र एवं सुगमतापूर्वक परमात्मतत्त्वकी प्राप्ति चाहनेवाले साधकोंका मार्गदर्शन करनेके लिये परमश्रद्धेय श्रीस्वामीजी महाराज की पुस्तकोंका पारमार्थिक जगत्में विशेष स्थान है। इन पुस्तकोंसे पारमार्थिक जगत्में एक क्रान्तिकारी परिवर्तन आया है। कारण कि इनमें गुह्यतम आध्यात्मिक विषयोंको सीधे-सरल ढंगसे प्रस्तुत किया गया है, जिससे साधक इधर-उधर न भटककर सीधी राह पकड़ सके। प्रस्तुत पुस्तक ‘सब साधनोंका सार’ भी इसी तरहकी पुस्तक है, जो प्रत्येक मार्गके साधकके लिये अत्यन्त उपयोगी है। सार बात हाथ लग जाय तो फिर सब साधन सुगम हो जाते हैं। परन्तु साधकका उद्देश्य अनुभव करनेका होना चाहिये, कोरी बातें सीखने और दूसरोंको सुनानेका नहीं। सीखा हुआ ज्ञान अभिमान बढ़ानेके सिवाय और कुछ काम नहीं आता। अत: पाठकोंसे नम्र निवेदन है कि वे अनुभवके उद्देश्यसे इस पुस्तकका गम्भीरतापूर्वक अध्ययन करें और लाभ उठायें।