नम्र निवेदन

इस युगके अप्रतिम महापुरुष परमश्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज आजीवन ऐसी युक्तियोंकी खोजमें लगे रहे, जिनसे मानवमात्र शीघ्र-से-शीघ्र तथा सुगमतापूर्वक अपना कल्याण कर सके। इस विषयमें उन्होंने अनेक क्रान्तिकारी युक्तियोंकी खोज भी की और उन्हें अपने प्रवचनों तथा पुस्तकोंके माध्यमसे जनतातक पहुँचाया। उनके ऐसे विलक्षण लेखों तथा प्रवचनोंका एक विशाल संग्रह पहले साधन-सुधा-सिन्धु नामसे प्रकाशित हो चुका है, जिसमें वि० सं० २०१० से लेकर २०५३ तक प्रकाशित पुस्तकोंका संकलन किया गया था।

‘साधन-सुधा-सिन्धु’ प्रकाशित होनेके बाद भी परमश्रद्धेय स्वामीजी महाराजकी अनेक कल्याणकारी पुस्तकोंका प्रकाशन हुआ। भगवान‍्की असीम कृपासे अब उन्हीं पुस्तकोंका संकलन ‘साधन-सुधा-निधि’ नामसे प्रकाशित किया जा रहा है। इस ग्रन्थमें वि० सं० २०५३ से लेकर २०६४ तक प्रकाशित पुस्तकोंका संकलन आ गया है।

वर्तमान समयमें परमात्मतत्त्व तथा उसकी प्राप्तिका साधन सरलतापूर्वक बतानेवाले ग्रन्थोंका अभाव-सा हो गया है। इस कारण सच्चे साधकोंको उचित मार्ग-दर्शन मिलना बहुत कठिन हो रहा है! ऐसी स्थितिमें आध्यात्मिक विषयकी अनेक मार्मिक बातोंसे युक्त यह ग्रन्थ साधकोंके लिये बहुत उपयोगी है और शीघ्र एवं सुगमतापूर्वक परमात्मतत्त्वका अनुभव करानेमें अत्यन्त सहायक है। किसी भी देश, जाति, धर्म, सम्प्रदाय आदिका कोई भी जिज्ञासु यदि प्रस्तुत ग्रन्थका मनोयोगपूर्वक अध्ययन करेगा तो उसके साधनमें अवश्य उन्नति होगी, इसमें सन्देह नहीं। आशा है कि साधकगण इस संकलनको पढ़कर लाभान्वित होंगे।