पुस्तकोंके नाम तथा उनके लेख, जो ‘साधन-सुधा-सिन्धु’ में संगृहीत हैं

विषय

१. जीवनका कर्तव्य

कर्मयोग

गीतामें भक्ति और उसके अधिकारी

भगवद्भक्तिका रहस्य

भगवद्भजनका स्वरूप

समयका मूल्य और सदुपयोग

वैराग्य

सब नाम-रूपोंमें एक ही भगवान्

भगवत्तत्त्व

सुख कैसे मिले?

बार-बार नहिं पाइये मनुष-जनमकी मौज

सन्त और उनकी सेवा

बालहितोपदेश-माला

गीता और रामायणके क्रियात्मक प्रचारकी आवश्यकता

२. साधन-रहस्य (एकै साधै सब सधै)

गीताका ज्ञेय तत्त्व

भक्तिकी सुलभता

सबका कल्याण कैसे हो?

अखण्ड साधन

दृढ़ भावसे लाभ

भगवत्प्राप्तिसे ही मानव-जीवनकी सार्थकता

उपासना शब्दका अर्थ एवं उसका स्वरूप

३. जीवनोपयोगी कल्याण-मार्ग

सभी कर्तव्य कर्मोंका नाम यज्ञ है

विषयासक्ति और भगवत्प्रीतिमें भेद

मनकी हलचलके नाशके सरल उपाय

दैवी सम्पदा एवं आसुरी सम्पदा

भगवत्प्राप्तिके लिये भविष्यकी अपेक्षा नहीं

कर्मचारियोंके तथा उद्योग-संचालकोंके कर्तव्य

४. सर्वोच्च पदकी प्राप्तिका साधन

सर्वोच्च पदकी प्राप्तिका साधन

५. जीवनका सत्य

माँ!

मनकी खटपट कैसे मिटे?

६. कल्याणकारी प्रवचन

प्राप्त और प्रतीति

मैं-मेरापन कैसे मिटे?

भगवान् से नित्ययोग

अपने अनुभवका आदर

अनुभव और विश्वास

शरीरसे अलगावका अनुभव

विकारोंसे कैसे छूटें?

संसारमें रहनेकी विद्या

सेवाकी महत्ता

स्वार्थरहित सेवाका महत्त्व

संसारका आश्रय कैसे छूटे?

परमात्मा तत्काल कैसे मिलें?

भगवत्प्राप्ति क्रियासाध्य नहीं

परमात्मप्राप्तिकी सुगमता

मनुष्यका वास्तविक सम्बन्ध

सुख-लोलुपताको मिटानेका उपाय

इच्छाके त्याग और कर्तव्य-पालनसे लाभ

परमात्मप्राप्तिमें भोग और संग्रहकी इच्छा

ही महान् बाधक

असत् पदार्थोके आश्रयका त्याग करें

७. तात्त्विक प्रवचन

सार बात

मुक्ति सहज है

संयोगमें वियोगका दर्शन

मुक्तिका रहस्य

जाग्रत् में सुषुप्ति

हमारा स्वरूप सच्चिदानन्द है

दृश्यमात्र अदृश्यमें जा रहा है

सत्य क्या है?

मैं शरीर नहीं हूँ

वास्तविक बड़प्पन

त्यागसे सुखकी प्राप्ति

तत्त्वप्राप्तिमें सभी योग्य हैं

अभिमान सबको दु:ख देता है

सांसारिक सुख दु:खोंके कारण हैं

हमारा सम्बन्ध संसारसे नहीं है

भगवत्प्राप्ति सहज है

संयोगमें वियोगका अनुभव

स्वभाव-सुधारकी आवश्यकता

अवगुणोंको मिटानेका उपाय

वास्तविक उन्नति किसमें?

कामनाओंके त्यागसे शान्ति

८. भगवान् से अपनापन

कर्मयोगका तत्त्व

भगवान् से अपनापन

सुगम साधन

सदुपयोगसे कल्याण

नाम-जप और सेवासे भगवत्प्राप्ति

९. भगवन्नाम

नाम-महिमा

नाम-जपकी विधि

दस नामापराध

होहि रामको नाम जपु

१०. जीवनोपयोगी प्रवचन

भय और आशाका त्याग

११. मानसमें नाम-वन्दना

१२. सत्संगकी विलक्षणता

सत्संगकी आवश्यकता

सन्त-महिमा

सन्त-चरण-रजका तात्पर्य

जीव लौटकर क्यों आता है?

श्रीमद्भगवद्गीता और भगवत्प्रेम

१३.नाम-जपकी महिमा

१४.मूर्ति-पूजा

१५.हम ईश्वरको क्यों मानें?

१६.दुर्गतिसे बचो

१७.आहार-शुद्धि

१८.कर्म-रहस्य

कर्म-रहस्य

वर्ण-व्यवस्थाका तात्पर्य

जाति जन्मसे मानी जाय या कर्मसे?

अपने कमर्ोंके द्वारा भगवान् का पूजन

समता कैसे करें?

१९. शरणागति

शरणागति

शरणागतिका रहस्य

भगवत्प्रेम

२०. वास्तविक सुख

भगवान् प्रेमके भूखे हैं

वास्तविक सुख

मनुष्य-जीवनका उद्देश्य

मनुष्य-जीवनकी सफलता

धन-संग्रहसे हानि

मिली हुई सामग्री अपनी नहीं

मिला हुआ और देखा हुआ—संसार

धनके लोभमें निन्दा

दृढ़ निश्चयकी महिमा

तत्त्वका अनुभव कैसे हो?

कारागार—एक शिक्षालय

सत्संगका मूल्य समझें

पारमार्थिक उन्नति धनके आश्रित नहीं

गोहत्या—एक अभिशाप

२१. साधकोंके प्रति

शीघ्र भगवत्प्राप्ति कैसे हो?

२२. अच्छे बनो

अपनी जानकारीको महत्त्व दें

सेवा कैसे करें?

सच्चा आश्रय

अच्छे बनो

वास्तविक बड़प्पन

मानव-जीवनका उद्देश्य

सावधान रहो!

सभी परमात्मप्राप्ति कर सकते हैं

दृढ़ विचारसे लाभ

भोगासक्ति कैसे छूटे?

मनुष्यकी तीन शक्तियाँ

प्रतिकूल परिस्थितिसे लाभ

स्वाधीनताका रहस्य

कल्याण सहज है

२३. भगवत्प्राप्तिकी सुगमता

तत्त्वप्राप्तिमें देरी नहीं है

अन्त:करणकी शुद्धिका उपाय

मुक्ति स्वत:सिद्ध है

सबमें परमात्माका दर्शन

शरणागतिकी विलक्षणता

तत्काल सिद्धिका मार्ग

साधनकी मुख्य बाधा

संसार जा रहा है!

सत्संगसे लाभ कैसे लें?

कल्याणका सुगम उपाय—

अपनी मनचाहीका त्याग

संकल्प-त्यागसे कल्याण

अपने साधनको सन्देहरहित बनायें

मनुष्य-जीवनकी सफलता

बन्धन कैसे छूटे?

सच्ची मनुष्यता

विश्वास और जिज्ञासा

नाशवान्की मुख्यतासे हानि

धर्मका सार

२४. स्वाधीन कैसे बनें?

पराधीनतासे छूटनेका उपाय

भगवान् में लगनेका उपाय

परमात्पप्राप्तिकी सुगमता

परमात्मप्राप्तिमें मुख्य बाधा—सुखासक्ति

सुखासक्तिसे छूटनेका उपाय

२५. गृहस्थमें कैसे रहें?

गृहस्थ-धर्म

व्यवहार

बालक-सम्बन्धी बातें

सन्तानका कर्तव्य

स्त्री-सम्बन्धी बातें

लड़ाई-झगड़ेका समाधान

महापापसे बचो

२६. सत्संगका प्रसाद

मन-बुद्धि अपने नहीं

कर्म किसके लिये?

खण्डन-मण्डनसे हानि

एक निश्चय

विकार आपमें नहीं हैं

राग-द्वेषका त्याग

सत्संगकी आवश्यकता

अहंताका त्याग

ममताका त्याग

२७. सच्चा गुरु कौन?

सच्चा गुरु कौन?

गुरु कैसा हो?

कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्

२८. आवश्यक शिक्षा

२९. सहज साधना

निर्दोषताका अनुभव

नित्ययोग तथा उसका अनुभव

जिज्ञासा और बोध

अहम्का नाश तथा तत्त्वका अनुभव

करण-निरपेक्ष तत्त्व

असत् का वर्णन

वर्णानातीतका वर्णन

चुप-साधन

भगवान् में अपनापन

३०. नित्ययोगकी प्राप्ति

सत्स्वरूपका अनुभव

मुक्ति सहज है

मुक्तिका सरल उपाय

करणनिरपेक्ष परमात्मतत्त्व

स्वत:सिद्ध तत्त्व

सत् -असत् का विवेक

नित्ययोगकी प्राप्ति

प्राप्त जानकारीके सदुपयोगसे कल्याण

जीवकृत सृष्टिसे बन्धन

दु:खका कारण—संकल्प

दु:ख-नाशका उपाय

अनित्य सुखकी रुचि मिटानेकी आवश्यकता

काम-क्रोधसे छूटनेका उपाय

विकारोंसे छूटनेका उपाय

राग-द्वेषसे रहित स्वरूप

३१. वासुदेव: सर्वम्

वासुदेव: सर्वम्

प्राप्त तत्त्वका अनुभव

सबके अनुभवकी बात

अहंकार तथा उसकी निवृत्ति

उद्देश्यकी महत्ता

साधक कौन है?

मनकी चञ्चलता कैसे मिटे?

मृत्युके भयसे कैसे बचें?

३२. साधन और साध्य

करणसापेक्ष-करणनिरपेक्ष साधन और करणरहित साध्य

३३. कल्याण-पथ

भगवत्तत्त्व

कल्याणका सुगम साधन—कर्मयोग

भगवान विवस्वान्को उपदिष्ट कर्मयोग

गीताकी अलौकिक शिक्षा

योग: कर्मसु कौशलम्

भगवान् और उनकी दिव्य शक्ति

भक्तशिरोमणि श्रीहनुमान्जीकी दास्य-रति

संकीर्तनकी महिमा

देवता कौन?

मुक्तिका उपाय

गीतामें चरित्र-निर्माण

गीतोक्त सदाचार

भगवान् विष्णु

भगवान् शंकर

३४. मातृशक्तिका घोर अपमान

मातृशक्तिका घोर अपमान

दहेज-प्रथासे हानि

‘ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी’

३५. जिन खोजा तिन पाइया

जिन खोजा तिन पाइया

सत्-असत् का विवेक

अवस्थातीत तत्त्वका अनुभव

करणसे अतीत तत्त्व

अहम् हमारा स्वरूप नहीं

मुक्ति और भक्ति

परमात्मा सगुण हैं या निर्गुण?

साधकका कर्तव्य

विवेककी जागृति

भोग और योग

उद्देश्यकी दृढ़तासे लाभ

३६. किसानोंके लिये शिक्षा

३७. तत्त्वज्ञान कैसे हो?

तत्त्वज्ञान क्या है?

तत्त्वज्ञानका सहज उपाय

सबसे सुगम परमात्मप्राप्ति

असत् का त्याग तथा सत् की खोज

सहजनिवृत्ति और स्वत: प्राप्ति

विभागयोग

शब्दसे शब्दातीतका लक्ष्य

अविनाशी रस

कर्मयोगसे कल्याण

मुक्तिमें सबका समान अधिकार

३८. भगवान् और उनकी भक्ति

भक्ति, भक्त तथा भगवान्

भक्ति और उसकी महिमा

भगवान् का सगुण स्वरूप और भक्ति

प्रेम, प्रेमी तथा प्रेमास्पद

सर्वश्रेष्ठ साधन

सब कुछ भगवान् ही हैं

विलक्षण भगवत्कृपा

वास्तविक सिद्धिका मार्ग

प्रार्थना और शरणागति

३९. जित देखूँ तित तू

गीताका तात्पर्य

गीताका अनासक्तियोग

जित देखूँ तित तू

भक्तिकी श्रेष्ठता

अनिर्वचनीय प्रेम

करणनिरपेक्ष साधन—शरणागति

गीताकी शरणागति

सत्संग सुननेकी विद्या

संयोग, वियोग और योग

४०. देशकी वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम

संघर्षका कारण

गृहस्थोंके लिये

देशकी वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम

घोर पापोंसे बचो

गर्भपात महापाप क्यों?

४१. सब जग ईश्वररूप है

सब जग ईश्वररूप है

विविध रूपोंमें भगवान्

सर्वत्र भगवद्दर्शन

भगवत्प्राप्तिका सुगम तथा शीघ्र सिद्धिदायक साधन

गीताकी विलक्षण बात

अपने प्रभुको कैसे पहचानें?

भगवान् का अलौकिक समग्ररूप

अलौकिक साधन—भक्ति

प्रार्थना

४२. आवश्यक चेतावनी (यह विकास है या विनाश? जरा सोचिये)

सबसे पड़ा पाप—गर्भपात

सर्वश्रेष्ठ हिन्दूधर्म और उसके ह्रासका कारण

राजाका कर्तव्य

आवश्यक चेतावनी

४३. गायकी महत्ता और आवश्यकता

पुस्तक-रूपसे अप्रकाशित लेख

भक्त और आदर्श सन्तान कैसे हो?

प्रतिकूलतामें विशेष भगवत्कृपा