अहैतुकी भगवत्कृपा

याद रखो—भगवान् हैं; भगवान् सदा सर्वत्र हैं, भगवान् सबके हैं; तुम्हारे भी हैं—उतने ही जितने वे किसी भी बड़े-से-बड़े संत-महात्माके हैं। भगवान् पर सदा सुदृढ़ तथा अटल विश्वास रखो, उनकी अहैतुकी कृपा सदा तुमपर अनवरत बरस रही है—इसपर विश्वास रखो।

याद रखो—भगवान‍्की सत्ता, भगवान‍्की सर्वशक्तिमत्ता, भगवान‍्की सर्वज्ञता, भगवान‍्की सहज सर्वभूतसुहृदता, भगवान‍्की दीन-बन्धुता नित्य, सत्य, सनातन, अक्षुण्ण एवं अपरिसीम है। इसपर कभी तनिक भी संदेह न करो। वरं सुदृढ़ विश्वास रखो।

याद रखो—भगवान‍्के ये स्वरूपभूत गुण सदा ही तुम्हारे लिये कार्य कर रहे हैं, इसपर तुम जितना ही अधिक विश्वास रखोगे, उतना ही तुम्हें अनुभव होगा कि भगवान् नित्य तुम्हारे समीप—तुम्हारे साथ रहकर अपनी अचिन्त्य-अनिर्वचनीय-अनन्त शक्तिमत्ता, सर्वज्ञता, सुहृदता और दीनबन्धुतासे तुम्हारा परम कल्याण कर रहे हैं।

याद रखो—जब तुम्हारा भगवान् पर और उनके स्वरूपभूत गुणोंपर विश्वास हो जायगा, तब तुम्हें सांसारिक दृष्टिसे महान् दु:खमयी, कष्टमयी, संतापमयी स्थितिमें भी परम शान्ति तथा परम सुखकी अनुभूति होगी। तुम सदा यही देखोगे कि भगवान् तुम्हारा परम कल्याण करनेके लिये तुम्हारे अपने माने हुए मिथ्या तन-मनसे तुम्हारा मोह छुड़ाकर तुम्हें अपने अत्यन्त निकटस्थ रखनेकी मंगलमयी व्यवस्था कर रहे हैं।

याद रखो—भगवान‍्का प्रत्येक विधान तुम्हारे निश्चित कल्याणके लिये है; अतएव कभी निराश मत होओ, कभी भय न करो, कभी विषाद मत करो। भगवान‍्की नित्य अहैतुकी कृपापर विश्वास रखो, जगत‍्के प्राणी-पदार्थोंसे कुछ भी आशा न रखकर अपने वास्तविक कल्याणके लिये भगवान् पर पूर्ण विश्वासके साथ निश्चित आशा करो। सतत आशान्वित रहो और हर हालतमें परम सुखका अनुभव करो।

याद रखो—तुम वस्तुत: भगवान‍्की सेवाके लिये ही जगत‍्में भेजे गये हो। तुम्हें अपने प्रत्येक पदार्थको, प्रत्येक विचारको, प्रत्येक शक्तिसामर्थ्यको एवं प्रत्येक क्रियाको भगवान‍्की वस्तु मानकर उन सबके द्वारा नित्य-निरन्तर भगवान‍्की सेवामें ही लगे रहना है। यह न करके यदि तुम अपनेको अन्य किसी कार्यके लिये आया मानते हो या जगत‍्के प्राणी-पदार्थ-परिस्थितियोंको अपनी मानकर अपने सुखोपभोगोंके लिये उनका उपयोग करना चाहते हो तो तुम बड़ी भूलमें हो; भूलमें ही नहीं हो—अपराध कर रहे हो, पाप बटोर रहे हो—जिनका फल तुम्हें बहुत बुरे रूपमें भोगना पड़ेगा।

याद रखो—तुम जो कुछ अच्छे विचार या अच्छे कर्म करते हो, वह सब भगवान‍्की सत्प्रेरणा और भगवान‍्की शक्तिसे ही करते हो। कभी किसी भी अच्छे विचार या अच्छी क्रियामें अपनेको कर्ता मानकर तनिक भी अभिमान न करो, वरं भगवान‍्ने तुम्हें अच्छेमें निमित्त बनाया, इसके लिये उनके कृतज्ञ होओ और विशेष उत्साहके साथ सेवामें लगे रहो।

याद रखो—भगवान‍्का कृपामय मंगलविधान भगवान‍्की सर्वज्ञताके साथ ही निर्मित हुआ है। उसका कब कैसे प्रयोग होगा और किस रूपमें कैसे उससे फलका उदय होगा—यह सब पहलेसे सुनिश्चित है। अतएव कभी ऊबो मत, घबराओ मत, अधीर मत होओ, आशामें तनिक भी कमी न आने दो और फलकी मंगलमयता तथा भगवद्रूपतामें तो कभी तनिक भी सन्देह न करो। शीघ्र या देर—दोनों ही भगवान‍्के कल्याण-विधानके अनुसार निश्चित ही तुम्हारे परम कल्याणके लिये ही हैं। तुम तो निश्चितरूपसे नित्य-निरन्तर उनकी कृपाकी प्रतीक्षा करते हुए—सर्वत्र सब अवस्थाओंमें उनकी कृपाके दर्शन करते हुए उनके भजनमें—उनकी सर्वतोमुखी सेवामें ही लगे रहो।