भगवान् अकारण हितैषी
याद रखो—भगवान् पर अनन्य तथा सुदृढ़ विश्वास होते ही सारी चिन्ताएँ, सारी दु:खद परिस्थितियाँ और सारी बाधाएँ अपने-आप दूर हो जाती हैं; क्योंकि तुम्हारे लिये जो कुछ भी फल निर्माण होता है, सब भगवान्के ही नियन्त्रणमें होता है और भगवान् हैं तुम्हारे सुहृद्—अकारण हित करनेवाले परम मित्र। अतएव जो कुछ भी तुम्हारे लिये बना है या बनेगा, वह सभी सहज ही तुम्हारे लिये कल्याणरूप होगा।
याद रखो—भगवान्के द्वारा निर्मित प्रत्येक विधान तुम्हारे लिये निश्चित कल्याणरूप है, यह निश्चय होते ही सारी चिन्ताएँ अपने-आप नष्ट हो जाती हैं।
याद रखो—भगवान् भलीभाँति निर्भ्रान्तरूपसे जानते हैं कि तुम्हारा वास्तविक ‘कल्याण’ किस परिस्थिति या किस वस्तुमें है। अतएव तुम्हारे लिये वही विधान करते हैं, उसी परिस्थिति और वस्तुको प्रदान करते हैं, जो तुम्हारे लिये निश्चित मंगलमयी है, भले ही वह देखनेमें प्रतिकूल हो। पर जब तुम यह विश्वास कर लोगे कि तुम्हारे लिये यह मंगलमयी ही है, तब तुम्हारी उसमें प्रतिकूल बुद्धि हट जायगी, अनुकूल बुद्धि हो जायगी और अनुकूल बुद्धि होते ही सारे दु:खोंका—सारी दु:खद परिस्थितियोंका नाश हो जायगा; क्योंकि प्रत्येक परिस्थिति ही अनुकूल होकर सुखस्वरूपा बन जायगी।
याद रखो—भगवान् सर्वशक्तिमान् हैं, वे सब कुछ करनेमें समर्थ हैं, कोई भी ऐसी शक्ति नहीं है, जो उनका विरोध कर सके वरं सच्ची बात तो यह है कि सारी शक्तियोंके एकमात्र मूलस्रोत या अनन्त भण्डार वे ही हैं। वे जब जिस किसी भी परिस्थिति या वस्तुके द्वारा तुम्हारा कल्याण करेंगे, तब तुम्हारा कल्याण निश्चय ही उसी परिस्थिति और उसी वस्तुके द्वारा होगा। कोई भी बाधा नहीं रह जायगी।
याद रखो—भगवान् सत्यसंकल्प हैं। उनका संकल्प और संकल्पसिद्धि—दोनों साथ ही होते हैं। अतएव तुम्हारे लिये भगवान्का मंगल संकल्प होते ही वह सिद्ध हो जायगा—सफल हो जायगा।
याद रखो—भगवान् कल्याणमय हैं—मंगलमय हैं, वे सदा ही सबका कल्याण—मंगल स्वरूपत: करते रहते हैं और वे तुम्हारे परम सुहृद् हैं, इसलिये अवश्य ही तुम्हारा कल्याण करते हैं तथा करेंगे। पर तुम्हारा उनकी मंगलमयतापर और उनकी सुहृदतापर विश्वास नहीं है, तुम अपनी मनमानी परिस्थिति और वस्तुमें अपना कल्याण मानते हो और मनके विरुद्ध परिस्थिति एवं वस्तुमें अपना अकल्याण या अमंगल मानते हो—इसीसे अनुकूलता-प्रतिकूलताका अनुभव करते हो और सुखी-दु:खी होते रहते हो। बल्कि कई बार ऐसा होता है कि तुम भूलसे यथार्थ अनुकूल परिस्थिति और वस्तुको प्रतिकूल मान बैठते हो और यथार्थत: प्रतिकूलमें अनुकूल-बुद्धि कर लेते हो। अतएव भगवान् पर, उनकी सुहृदतापर, उनकी अनिवार्य मंगलमयतापर विश्वास करो—अटल और अनन्त विश्वास करो। प्रत्येक परिस्थिति और वस्तु तुम्हारे लिये कल्याणमयी—आनन्दमयी हो जायगी।