भगवान् चिदानन्दमय

याद रखो—भगवान् चिदानन्दस्वरूप हैं, परमानन्दमय हैं और वे दिन-रात आठों पहर तुम्हारे साथ रहते हैं—सोते-जागते, खाते-पीते, चलते-बैठते—सभी समय, सभी अवस्थाओंमें। तुम उनको भूले हुए हो, इसीसे दु:खी होते हो। उनका अनुभव नहीं करते, इसीसे भय-विषादसे भरे रहते हो। अनुभव करो—तुम्हारे जीवनके प्रत्येक क्षणमें भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारे जीवनकी प्रत्येक क्रियामें भगवान् तुम्हारे साथ हैं।

याद रखो—वास्तवमें समस्त जगत‍्के रूपमें एकमात्र भगवान् ही अभिव्यक्त हो रहे हैं। भगवान् ही एकमात्र सत्य हैं। वे आनन्दस्वरूप हैं। जगत‍्में जो कुछ सुन्दर-भयानक हो रहा है, सब उन्हीं आनन्दस्वरूपकी आनन्दमयी लीला है; इसे अनुभव करो और नित्य सुखी हो जाओ।

याद रखो—भगवान‍्से रहित जिस जगत‍्की कल्पना है, वह सर्वथा असत् है और जहाँ उसकी कल्पित सत्ता है, वहाँ वह अनित्य, अपूर्ण तथा नित्य अत्यन्त दु:खमय है। उसमें सदा सर्वत्र दु:खकी ही नयी-नयी ज्वालाएँ प्रकट होती और भड़कती रहती हैं; उससे त्राण पाना हो तो वह जिन आनन्दमय भगवान‍्में कल्पित है, सदा सर्वत्र उन आनन्दमय लीलामय भगवान‍्को और उनकी आनन्दमयी लीलाको ही देखो।

याद रखो—तुम भी आनन्दमयकी आनन्दमयी लीला-सुधाधाराके प्रवाहमें ही उन्हीं लीला-समुद्रकी एक तरंग बने बह रहे हो, जब तुम उस आनन्दसमुद्रकी तरंग हो तब स्वयं आनन्दसमुद्रके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं हो।

याद रखो—जगत‍्में जो कुछ भी व्यवहार हो रहा है—सब उनकी आनन्दमयी लीला है और जो कुछ भी है, सब वे स्वयं आनन्दमय भगवान् ही हैं। अत: प्रत्येक व्यवहारमें उनकी लीलाके दर्शन करो और प्रत्येक पदार्थमें स्वयं लीलामयके। प्रत्येक फलके स्वरूपमें भी लीलामय भगवान् ही आते हैं—कभी रोग बनकर—कभी नीरोगता बनकर; कभी सृजन बनकर—कभी संहार बनकर; कभी मान बनकर—कभी अपमान बनकर; कभी सुख बनकर—कभी दु:ख बनकर और कभी लाभ बनकर—कभी हानि बनकर। तुम सबमें सदा उन्हींको देखो।

याद रखो—वे भगवान् ही सब कुछ हैं। माता, पिता, गुरु, पति, भाई, मित्र, जिस किसी भी रूपमें—जैसा जो कुछ भी सम्बन्ध मानकर उनको अपना बना लो, वे उसी रूपमें तुम्हारे बनने और तुमको अपना बनानेके लिये तैयार हैं।

याद रखो—विश्वासके योग्य वही होता है जो सत्य है, नित्य है; असत्य और अनित्यपर विश्वास करनेवाला तो निराश ही होता है, धोखा ही खाता है। सत्य और नित्य एक भगवान् ही हैं। भगवान‍्के सिवा और जो कुछ भी है, सब असत्य है, कल्पित है और देखनेमें भी अनित्य प्रत्यक्ष है। अतएव भगवान‍्के अतिरिक्त अन्य किसीपर विश्वास तथा भरोसा करोगे तो वह तुम्हारी मूर्खता होगी; क्योंकि तुम उससे धोखा ही खाओगे।

याद रखो—तुम भगवान् पर विश्वास करके उन्हींको एकमात्र अपना मानकर उनकी ओर बढ़ना चाहोगे तो वे सहज अहैतुक सुहृद् तुम्हें सुखपूर्वक अपनी ओर खींच लेंगे। तुम्हारे सारे बाधा-विघ्नोंका सहज ही नाश हो जायगा। तुम्हारा पथ सुगम, सुखमय और प्रशस्त हो जायगा। इतना ही नहीं—जब तुम उनकी ओर चलना शुरू कर दोगे तब वे अपने प्रणके अनुसार तुम्हारी ओर चलना आरम्भ कर देंगे। वे चलेंगे अपनी चालसे औरउनकी चाल है चलनेका संकल्प करते ही वहाँ पहुँच जाना। अतएव वे भगवान् तुम्हारे पास तुरंत आ पहुँचेंगे और उनका मंगलमय पावन सुदुर्लभ दर्शन-स्पर्श प्राप्तकर तुम कृतार्थ हो जाओगे। फिर कण-कणमें प्रतिक्षण अनवरत-रूपसे तुम उनके दर्शन करते रहोगे, तुम्हारा जीवन धन्य हो जायगा।