भगवान् परम सुहृद्

याद रखो—सर्वशक्तिमान्, सर्वेश्वर भगवान् तुम्हारे परम सुहृद् हैं, वे सदैव सर्वत्र स्वयं तुम्हारी सहायताके रूपमें प्रस्तुत हैं। जब कभी तुम्हें मनमें निराशा हो, तुम अपनेको असहाय, निराश्रय, सबके द्वारा उपेक्षित और अकेले समझने लगो—तभी विश्वासपूर्वक उन अपने भगवान‍्को पुकारो। वे तुरंत तुम्हारी सहायताके लिये तुम्हारे पास आ खड़े होंगे।

याद रखो—भगवान‍्के लिये न तो कोई जीव छोटा-बड़ा है और न कोई काम ही छोटा-बड़ा है। वे सबके सबसे अधिक निकटस्थ आत्मीय हैं—अपने हैं। न तो छोटे-से-छोटा बनकर छोटा काम करनेमें उन्हें लज्जा-संकोच है और न वे दूसरोंके लिये असम्भव, महान्-से-महान् विशाल अत्यन्त कठिन कार्य सम्पन्न करनेमें असमर्थ हैं। तुम अपनेको उनपर छोड़ दो—केवल उन्हींपर छोड़ दो, वे तुम्हारे सारे अभावोंकी पूर्ति कर देंगे या अभावकी अनुभूति ही पूर्णरूपसे समाप्त कर देंगे। तुम परम सुखी हो जाओगे।

याद रखो—भगवान‍्के लिये कुछ भी असम्भव नहीं है। वे सर्वभावेन समर्थ हैं और ‘कर्तुमकर्तुमन्यथाकर्तुं समर्थ:’ हैं। तुम अडिग तथा पूर्ण विश्वासके साथ अपनेको सर्वतोभावेन उनपर छोड़ दो। तुम्हारे मार्गके सारे अवरोध दूर हो जायँगे, सारे बड़े-से-बड़े विघ्न हट जायँगे, सारी कठिनाइयोंके किले अनायास ही टूट जायँगे। तुम्हें पाथेययुक्त तथा सच्चे प्रिय संगीके सहित प्रशस्त पथ मिल जायगा और तुम बिना ही परिश्रमके सुखपूर्वक हँसते-हँसते अपने लक्ष्यपर पहुँच जाओगे।

याद रखो—भगवान् तुम्हारी प्रत्येक परिस्थितिमें और तुम्हारी प्रत्येक यथार्थ आवश्यकताके समय तुम्हारे सहज सहायक हैं। जब तुम दूसरे सारे आश्रयोंका त्याग करके उनके सौहार्दकी ओर दृष्टिपात करोगे और अपना सारा योगक्षेम उन्हींको मान लोगे—यदि सचमुच तुम ऐसा कर सकोगे—तो तुम देखोगे कि तुम्हारा हृदय अकस्मात् हरा हो गया है, ऊँचा उठ गया है, तुम्हारी निराशा नष्ट हो गयी है, तुम्हें प्रत्यक्ष सहायता मिलने लगी है, तुम्हारे साथ एक कभी न हटनेवाला— कभी साथ न छोड़नेवाला मित्र आ खड़ा हुआ है। तुम उपेक्षित नहीं हो—बड़ी प्रीतिके साथ समादरपूर्वक तुम्हारी देख-रेख की जा रही है और एक कोई वरद-हस्त सदा-सर्वदा तुम्हें अभयदान दे रहा है।

याद रखो—तुम भगवान् पर विश्वासपूर्वक पूर्ण निर्भर नहीं करते, उनके नित्य अपनेपनपर दृढ़ विश्वास नहीं करते, उनकी सुधामयी, शक्तिमयी सहज कृपाकी ओर दृष्टिपात नहीं करते—इसीसे अपनेको असहाय, निराश्रय और निराश पाते हो; इसीसे भय, चिन्ता और विषादके बादलोंसे घिरे रहते हो। इस संदेहभरी डावाँडोल स्थितिसे अपनेको अलग कर लो, फिर देखोगे—तुम्हारी प्रत्येक यथार्थ आवश्यकताके समय सर्वदाता भगवान् तुम्हारे सहायकके रूपमें खड़े हैं।

याद रखो—भगवान् तुम्हारे हैं, तुम भगवान‍्के हो। इस नित्य सत्य अचल स्थितिको भूलकर ही तुम संशय-सागरके नये-नये दु:खोंकी तरंगोंके आघातसे घायल हो रहे हो। यह मिथ्या स्थिति है। भगवान् पर विश्वास करो—पूर्ण विश्वास करो। यह असत् संशय-सागर तुरंत सूख जायगा और तुम अपनेको भगवान‍्की सत्य-नित्य-सुखद गोदमें पाओगे।