परमात्मसुखकी विलक्षणता

याद रखो—संसारके बड़े-से-बड़े भोग-सुखोंकी अपेक्षा परमात्मसुख अत्यन्त विलक्षण और अनुपम है। संसारके किसी भी सुखके लिये परमात्मसुखकी साधनामें जरा भी बाधा कभी मत आने दो। किसी भी हालतमें परमात्मसाधनामें शिथिलता मत आने दो। यह भी मत देखो कि लोग क्या कह रहे हैं और क्या कर रहे हैं। तुम्हारी अपनी साधनाका कार्य सच्चा निर्दोष होना चाहिये।

याद रखो—अपने निर्दोष साधनको या सत्कार्यको भय, संकोच, लोकविरोध आदि कारणोंसे जो छोड़ देता है, वह पतित हो जाता है। भगवान‍्के सामने—अपने आत्माके सामने तुम्हारा कार्य निर्दोष और सत् होना चाहिये, फिर चाहे कोई कुछ भी कहे उसकी परवा नहीं करनी चाहिये और अटल-अचलभावसे श्रद्धा-विश्वासके साथ उस सत्कार्यमें लगे रहना चाहिये।

याद रखो—तुम्हारे साधनमें विघ्न आ सकते हैं, प्रबल प्रतिकूलता आ सकती है, विकट विपत्ति आ सकती है; पर उससे घबराओ मत। शुद्ध मनसे भगवान् पर विश्वास करके अपनी साधनामें जुटे रहो और भगवान‍्से प्रार्थना करो कि वे अपनी कृपासे सब विघ्नोंको दूर कर दें। भगवान् जरूर दूर कर देंगे। उनकी घोषणा है, मुझमें चित्त लगानेवाले पुरुषको मेरी कृपा सारे विघ्न-बाधाओंसे पार लँघाकर आगे ले जाती है।

याद रखो—कभी-कभी जगत‍्की अनुकूलता, लोगोंके द्वारा मिलनेवाला मान, प्रतिष्ठा-प्रशंसा आदि भी साधनामें बहुत बड़े विघ्नका काम करती हैं। वे वास्तविक परमार्थसाधनासे हटाकर अपने नामरूपकी पूजा-प्रतिष्ठाकी साधनामें लगा देती हैं। वह फिर, भगवान‍्की प्रसन्नताकी जगह लोकरंजनमें लगाकर अपनेको लोकानुकूल निषिद्ध आचरणोंमें लगा देता है और पतित हो जाता है। इसी प्रकार श्रद्धालु लोगोंके द्वारा शरीर-सुख—इन्द्रिय-भोगोंकी प्राप्ति भी साधनाका बड़ा विघ्न है। इन्द्रिय-सुखकी प्रवृत्ति बहुत ही शीघ्र परमार्थ-साधनाका विनाश करती है। इसलिये न तो दु:ख, विपत्ति, प्रतिकूलता, निन्दासे डरो और न मान-प्रतिष्ठा, पूजा, भोग-सुख आदिमें फँसो। इन दोनों प्रकारके विघ्नोंसे दूर रहकर नित्य-निरन्तर परम निष्ठाके साथ निर्दोष परमार्थ-साधनमें लगे रहो।

याद रखो—साधनामें कहीं बाहरका दिखावा न आ जाय। साधनाका बाहरी दिखावा सर्वथा नकली चीज है। अंदरसे साधनामें लगे रहो। हृदयको सदा काम, क्रोध, लोभ, हिंसा, वैर, दम्भ, दर्प आदि सारे दोषोंसे शून्य करके परम उज्ज्वल और पवित्र रखो। बाहरसे लोग तुम्हें साधक न बतावें तो उसमें तुम्हारा परम लाभ है, तुम्हारा साधन-धन उत्तरोत्तर बढ़ता रहेगा और बाहरसे यदि लोग तुम्हारी निन्दा करें तब तो तुम अपनेको विशेष भाग्यवान् और भगवान‍्का कृपापात्र समझो; क्योंकि ऐसा होनेपर तुम्हारी निर्दोषता बढ़ेगी, उज्ज्वलता बढ़ेगी और संसारमेंसे आसक्ति दूर होगी। मन कहीं फँसेगा नहीं।

याद रखो—साधनामें सदा श्रद्धा-विश्वास, सावधानी, संलग्नता तथा क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिये। अश्रद्धा, प्रमाद, आलस्य और अकर्मण्यता कर्तव्यविमुख बना देती है। निरन्तर उत्साह, उल्लास, विश्वासके साथ साधनामें लगे रहो।

याद रखो—साधनामें कभी उकताओ मत, ऊबो मत, धैर्यके साथ लगे रहो। बस, लगे रहो। विश्वास करो, तुम अवश्य-अवश्य सफल होओगे। यदि कुछ देर हो रही है तो वह इसीलिये हो रही है कि तुम अपने प्रियतम प्रभुसे अबाध मिलनेके लिये समस्त दोषोंसे रहित होकर उनके योग्य बनाये जा रहे हो, सजाये जा रहे हो परम प्रियतमसे मिलनेके लिये।