सब रूपोंमें भगवान्
याद रखो—भगवान् एक हैं। उन्हींमें सारी सृष्टि है। प्रत्येक प्राणीके वे सुहृद् हैं। वे चाहते हैं कि हम उनसे मिलें, उनकी प्रीति प्राप्त करें, पर हम ऐसे अभागे हैं कि हम उनके चाहनेपर भी उनसे मिलना नहीं चाहते।
याद रखो—हमारे न चाहनेपर भी वे हमसे मिलना चाहते हैं और मिलना चाहते हैं एकान्तमें। वे कभी अपमानके रूपमें आते हैं, जिससे सम्मानकी सारी भीड़ हट जाती है। वे कभी निन्दाके रूपमें आते हैं, जिससे प्रशंसाका सारा कोलाहल शान्त हो जाता है। वे कभी दारिद्रॺके रूपमें आते हैं, जिससे आस-पास घेरा डाले रहनेवाले स्वार्थियोंके दल हट जाते हैं। वे कभी असफलताके रूपमें आते हैं, जिससे सफलताकी पूजा करनेवालोंका सारा समूह तितर-बितर हो जाता है और वे कभी भयानक पीड़ाके रूपमें आते हैं, जिससे उस पीड़ाके अतिरिक्त और कुछ भान ही नहीं रहता। इस प्रकार वे विभिन्न प्रतिकूल रूपोंमें आकर तुम्हें अकेला कर देते हैं और फिर अकेलेमें तुमसे मिलते हैं।
याद रखो—वे किसी भी रूपमें आवें, जब दूसरेकी सत्ता नहीं रहने देते, तब उनसे स्वाभाविक ही एकान्त-मिलन होता है। उस एकान्तमिलनमें यदि तुम उनको पहचान लेते हो तो तुम कृतकृत्य हो जाते हो। फिर तुम्हारे लिये कुछ भी करना-पाना शेष नहीं रह जाता। पर जबतक तुम उन्हें नहीं पहचान लेते, तबतक तुम्हारा भटकना और जलना नहीं मिट सकता।
याद रखो—अनुकूलताकी भीड़में उन्हें पहचानना बड़ा कठिन होता है। उस समय चारों ओर ऐसा कोलाहल मचा रहता है कि तुम उसीमें अपनेको खो देते हो। वे परम सुहृद् भगवान् तुम्हें इस कोलाहलसे मुक्त करके अपने स्वरूपकी पहचान करानेके निमित्त विभिन्न प्रतिकूलताओंके रूपमें आते हैं। प्रतिकूलतामें भीड़ तथा कोलाहल नहीं रहता। पहचान जल्दी होती है। ये सभी प्रतिकूलताएँ वस्तुत: उनके परम सौहार्दका ही परिचय है।
याद रखो—जब पेटमें या सिरमें भयानक पीड़ा होती है तब उस समय पीड़ाके अतिरिक्त कुछ भी भान नहीं रहता। उस पीड़ाके रूपमें वे एकमात्र अकेले रह जाते हैं और अकेलेमें तुम उन्हें पहचानकर एकान्तमें मिल सकते हो। वहाँ कोई बाधा देनेवाला नहीं रहता। इस प्रकार प्रत्येक भयानक प्रतिकूलतामें तुम उन्हें पहचानकर सहज ही एकान्त-मिलनका सुख लूट सकते हो। प्रतिकूलतामें वे ही आते हैं और आते हैं तुम्हें एकान्त-मिलनका सुख देनेके लिये।
याद रखो—प्रियतम भगवान्को पहचानते ही प्रतिकूलताका सारा दु:ख मिट जायगा और यह प्रत्यक्ष अनुभव होगा कि भगवान्ने अपनी अहैतुकी अनन्त कृपासे स्वयं प्रतिकूलताका रूप धारण किया है और इस प्रकार अपने एकान्त-मिलनका दिव्य अनुभव करा वे तुम्हें कृतकृत्य करनेको पधारे हैं। उनको पहचानो, स्वागत करो और उनसे मिलकर कृतार्थ हो जाओ।