परमश्रद्धेय श्रीस्वामीजी महाराजके मुख्य सिद्धान्त

१-मनुष्यमात्रको परमात्मप्राप्तिका जन्मसिद्ध अधिकार है।

२-मनुष्य जिस वर्ण, आश्रम, धर्म, सम्प्रदाय, वेश-भूषा, देश आदिमें है, वहीं रहते हुए वह अपना कल्याण कर सकता है।

३-मनुष्यमात्र प्रत्येक परिस्थितिमें परमात्माको प्राप्त कर सकता है। इसके लिये उसे परिस्थिति बदलनेकी जरूरत नहीं है।

४-सांसारिक वस्तुओंकी प्राप्ति तो कर्म करनेसे होती है, पर परमात्माकी प्राप्ति कुछ भी न करनेसे होती है।

५-परमात्माकी प्राप्ति जड़ता (शरीर-इन्द्रियाँ-मन-बुद्धि)-के द्वारा नहीं होती, प्रत्युत जड़ताके त्यागसे होती है।