प्राक्‍कथन

जीवन्मुक्त, तत्त्वज्ञ एवं भगवत्प्रेमी महापुरुषके सत्संगसे यथाश्रुत तथा यथागृहीत बातें मैं समय-समयपर अपनी डायरीमें लिखता रहा हूँ। उनमेंसे कुछ बातें ‘ज्ञानके दीप जले’ नामसे प्रकाशित की जा चुकी हैं; जिन्हें पाठकोंने बहुत पसन्द किया है। अब डायरीमें लिखित कुछ बातें ‘सत्संगके फूल’ नामसे प्रकाशित की जा रही हैं। सत्संग-प्रेमी पाठकोंसे यह आशा है कि वे ‘ज्ञानके दीप जले’ की भाँति प्रस्तुत पुस्तकसे भी लाभ उठायेंगे।

विनीत

संकलनकर्ता